रायपुर। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोकपर्व पोरा तिहार (पोला) के अवसर पर क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष और किसान नेता वीरेन्द्र सिंह तोमर ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि पोरा तिहार पशुओं के प्रति प्रेम, सम्मान और उनके योगदान के प्रति आभार व्यक्त करने वाला महत्वपूर्ण लोकपर्व है।
पशुओं के प्रति आभार का पर्व है पोरा तिहार
पोरा तिहार भाद्रपद मास की अमावस्या यानी पिठोरी अमावस्या के दिन मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से खेती-किसानी में बैलों के योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा से जुड़ा है।
इस दिन किसान अपने बैलों को स्नान कराकर उनका श्रृंगार करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। पर्व के दौरान बैलों से किसी भी तरह का काम नहीं कराया जाता। इस परंपरा के जरिए किसान खेती में पशुओं की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करते हैं।
गौमाता को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग का समर्थन
वीरेन्द्र सिंह तोमर ने पोरा तिहार के अवसर पर पशु प्रेम और संरक्षण की भावना को आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने गौमाता को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग का भी समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में पशुओं के प्रति सम्मान और संवेदना की समृद्ध परंपरा रही है। पोरा तिहार इसी भावना को जीवंत रखने और पशुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है।
ठेठरी, खुरमी और चीला से महकते हैं घर
पोरा तिहार के मौके पर छत्तीसगढ़ के घरों में पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं। ठेठरी, खुरमी, चीला समेत कई छत्तीसगढ़ी व्यंजन इस पर्व की खास पहचान हैं।
वहीं बच्चों में भी पोरा तिहार को लेकर खास उत्साह रहता है। बच्चे मिट्टी के बैलों से खेलते हैं। कई स्थानों पर बैल दौड़ जैसे पारंपरिक आयोजन भी किए जाते हैं। सजे-धजे बैलों की पूजा और उनका श्रृंगार पर्व के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है।
कई राज्यों में मनाया जाता है पोला
पोरा या पोला पर्व छत्तीसगढ़ के अलावा महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और कर्नाटक में भी विशेष रूप से मनाया जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी परंपराओं और आयोजन के तरीके में कुछ अंतर देखने को मिलता है, लेकिन खेती-किसानी और पशुओं के प्रति सम्मान इसकी मूल भावना है।
वीरेन्द्र सिंह तोमर ने प्रदेशवासियों को पोरा तिहार की शुभकामनाएं देते हुए लोकपर्व की परंपराओं को सहेजने और पशुओं के प्रति प्रेम, सेवा एवं संवेदना की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।
