Wednesday, July 15, 2026

भरत तिवारी एनकाउंटर विवाद: बढ़ते जनदबाव के बीच पुलिस अधिकारियों पर हत्या का केस, न्यायिक जांच के आदेश

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पटना/भोजपुर:
बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित बिलौटी गांव में सोशल मीडिया एक्टिविस्ट भरत भूषण तिवारी की पुलिस कार्रवाई के दौरान हुई मौत ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है। घटना के बाद लगातार उठ रहे सवालों, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन के बीच राज्य सरकार ने मामले की न्यायिक जांच कराने तथा संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने का निर्णय लिया है।

क्या है मामला?

पुलिस और एसटीएफ के अनुसार 17 जून को सूचना मिली थी कि भरत तिवारी अवैध हथियार के साथ सार्वजनिक रूप से फायरिंग कर रहे हैं। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तारी के प्रयास के दौरान भरत ने आत्मसमर्पण करने के बजाय पुलिस टीम पर कई राउंड गोलियां चलाईं। जवाबी कार्रवाई में उन्हें गोली लगी और बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

हालांकि इस आधिकारिक दावे पर तब सवाल खड़े हो गए जब घटना से ठीक पहले का एक फेसबुक लाइव वीडियो सामने आया। वायरल वीडियो में भरत तिवारी कैमरे के सामने अपनी बात रखते हुए दिखाई देते हैं। परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि वीडियो में वह हथियार छोड़ते और आत्मसमर्पण की मुद्रा में नजर आ रहे हैं, जिससे पुलिस की कार्रवाई पर संदेह पैदा हुआ है।

परिवार ने लगाया फर्जी एनकाउंटर का आरोप

मृतक के परिजनों का आरोप है कि भरत तिवारी स्थानीय मुद्दों, बाढ़ प्रभावित लोगों के पुनर्वास और भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे थे। परिवार का दावा है कि उन्हें निशाना बनाकर सुनियोजित तरीके से फर्जी एनकाउंटर किया गया। ग्रामीणों ने भी निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन किया।

सरकार ने उठाए बड़े कदम

लगातार बढ़ते दबाव के बाद प्रशासन ने कई अहम फैसले लिए हैं—

  • ऑपरेशन में शामिल तत्कालीन एसडीपीओ और शाहपुर थानाध्यक्ष समेत संबंधित पुलिसकर्मियों पर हत्या समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई।
  • मामले की जांच के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच समिति गठित की गई है।
  • प्रारंभिक कार्रवाई के तहत कई पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को निलंबित किया गया है।
  • जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।

महापंचायत में उठा इंसाफ का मुद्दा

बिलौटी गांव में आयोजित महापंचायत में विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सभा में वक्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पूरे घटनाक्रम की जवाबदेही तय करने की मांग की। कई नेताओं ने कहा कि केवल निचले स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि पूरे ऑपरेशन की कमान किसके निर्देश पर चली, इसकी भी जांच होनी चाहिए।

राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा

मामले ने राज्य की राजनीति को भी प्रभावित किया है। विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है, जबकि सत्तापक्ष के कुछ नेताओं ने भी पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया और जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। इससे यह मामला अब केवल एक पुलिस मुठभेड़ तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि कानून-व्यवस्था, मानवाधिकार और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ी बड़ी बहस का विषय बन गया है।

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