यात्रियों के लिए 5 सबसे बड़े सुधार
रेल मंत्री ने टिकट बुकिंग, कैंसिलेशन और बोर्डिंग स्टेशन से जुड़े नियमों को बेहद आसान बना दिया है:
- IRCTC से 3 करोड़ फर्जी अकाउंट्स खत्म: तत्काल टिकटों की ब्लैक मार्केटिंग और बोट्स (fraudulent software) के जरिए होने वाली धंधलेबाज़ी को रोकने के लिए आधार-बेस्ड OTP वेरिफिकेशन और कड़े तकनीकी कदम उठाए गए हैं। इसके तहत आईआरसीटीसी सिस्टम से लगभग 3 करोड़ फर्जी अकाउंट्स को डिलीट किया गया है, जिससे आम यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलने में आसानी होगी।
- चार्ट की टाइमिंग और कैंसिलेशन में बदलाव: पहले रिजर्वेशन चार्ट ट्रेन खुलने से 4 घंटे पहले बनता था, जिसे अब बढ़ाकर 9 से 18 घंटे पहले कर दिया गया है। इसके साथ ही टिकट कैंसिलेशन की टाइम विंडो (पहले जो 48, 12 और 4 घंटे थी) को बदलकर अब 72, 24 और 8 घंटे कर दिया गया है। इससे वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को पहले ही अपनी स्थिति का पता चल जाएगा।
- कहीं से भी काउंटर टिकट कैंसिल और ऑटोमैटिक रिफंड: अब देश के किसी भी रेलवे स्टेशन के काउंटर से खरीदे गए टिकट को किसी भी अन्य स्टेशन से कैंसिल कराया जा सकेगा (पहले यह सिर्फ बोर्डिंग स्टेशन से होता था)। इसके अलावा, ई-टिकट के लिए TDR (टिकट डिपॉजिट रसीद) फाइल करने की जरूरत को खत्म कर दिया गया है और पैसे सीधे अकाउंट में ऑटोमैटिक रिफंड हो जाएंगे।
- ट्रेन छूटने के 30 मिनट पहले तक क्लास अपग्रेड: यात्री अब चार्ट बनने के बाद भी, ट्रेन छूटने के 30 मिनट पहले तक अपनी यात्रा की क्लास (जैसे स्लीपर से थर्ड एसी) को डिजिटल रूप से अपग्रेड करा सकेंगे।
- 30 मिनट पहले बदलें बोर्डिंग स्टेशन: यदि कोई यात्री अपने तय स्टेशन से ट्रेन नहीं पकड़ पा रहा है, तो वह ट्रेन के ओरिजिनेटिंग स्टेशन से खुलने के 30 मिनट पहले तक डिजिटल तरीके से अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकता है। इससे उसकी कंफर्म सीट रद्द नहीं होगी और वह अगले किसी स्टेशन से ट्रेन पकड़ सकेगा।
कंस्ट्रक्शन और कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए कड़े नियम
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रेलवे प्रोजेक्ट्स में होने वाली देरी और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए निविदा (Tenders) के नियमों को मजबूत किया गया है:
- क्षमता की जांच: बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए बोली (Bid) लगाने वाले ठेकेदारों की योग्यता सीमा को सिंगल प्रोजेक्ट वैल्यू के 35% से बढ़ाकर 50% कर दिया गया है। यानी अब केवल सक्षम कंपनियां ही टेंडर डाल पाएंगी।
- रेलवे का अनुभव जरूरी: ठेकेदारों के पास कुल अनुभव का कम से कम 20% हिस्सा रेलवे से जुड़े कामों का होना अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि हाईवे या पोर्ट बनाने वाले बिना अनुभव के रेलवे के जटिल काम न लें। इससे प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे होंगे और मुकदमों में कमी आएगी।
कार्गो और वैगन डिजाइन में लचीलापन
स्पेशल वैगन डिजाइन: रेल मंत्री ने बताया कि टनल (सुरंगों) और पुलों की वजह से कुछ रूटों पर हर प्रकार के डिब्बे (Wagons) नहीं जा पाते थे। अब मैन्युफैक्चरर्स को रूट के हिसाब से हाई-कैपेसिटी वाले विशेष वैगन डिजाइन करने की छूट दी गई है।
गति शक्ति कार्गो टर्मिनल्स: माल ढुलाई की दक्षता बढ़ाने के लिए गति शक्ति कार्गो टर्मिनल्स की संख्या को 124 से बढ़ाकर 500 से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है।
कोच की सफाई पर विशेष ध्यान
ट्रेनों के अंदर साफ-सफाई को एंड-टू-एंड सुनिश्चित करने के लिए ऑन-बोर्ड क्लीनिंग (On-board cleaning) और रूट-आधारित विशेष टीमों (Route-based teams) को तैनात किया जा रहा है ताकि यात्रियों का सफर पूरी तरह स्वच्छ और आरामदायक रहे।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के इन फैसलों को भारतीय रेलवे के कायाकल्प और यात्रियों को दलालों से मुक्ति दिलाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)
