Saturday, June 13, 2026

ओमान की खाड़ी में अमेरिकी मिसाइल हमला: 3 भारतीय नाविकों की मौत, विदेश मंत्रालय के रुख पर उठे सवाल

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नई दिल्ली, 12 जून 2026: पश्चिम एशिया में ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी नाकेबंदी (Blockade) अभियान के दौरान एक बड़ा हादसा सामने आया है। ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना द्वारा तेल टैंकरों को निशाना बनाकर किए गए मिसाइल हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई है। इस अभियान में यह पहली बार है जब किसी हमले में नागरिकों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हुई है।

इस घटना के बाद भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव गहरा गया है, वहीं घरेलू स्तर पर मोदी सरकार की सधी हुई प्रतिक्रिया को लेकर विशेषज्ञों ने सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं।

घटना का मुख्य घटनाक्रम

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए 13 अप्रैल से लागू की गई नाकेबंदी के तहत की जा रही है। इस सप्ताह भारतीय चालक दल वाले तीन अलग-अलग तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया:

  • एमटी सेटेबेलो (MT Settebello): पलाऊ के झंडे वाले इस टैंकर पर अमेरिकी विमान ने इंजन रूम को निशाना बनाकर मिसाइल दागी। अमेरिकी सेना का दावा है कि जहाज ने बार-बार दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज किया था। इस हमले में लापता हुए तीन भारतीय नाविकों के शव बरामद कर लिए गए हैं।
  • एमटी मेरीवेक्स (MT Merivex): सोमवार को अमेरिकी F/A-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान ने इस टैंकर पर हमला किया था, जिसके बाद ओमान के अधिकारियों ने इस पर सवार सभी 24 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाला।
  • एमटी जलवीर (MT Jalveer): गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले इस जहाज पर भी अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दो हेलफायर मिसाइलें दागीं, जिससे जहाज में आग लग गई। हालांकि, विदेश मंत्रालय के अनुसार इस पर सवार सभी 20 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं।

भारत सरकार की प्रतिक्रिया और कूटनीतिक कदम

मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने नई दिल्ली में एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक को तलब (Summon) कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। केंद्रीय पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पुष्टि की है कि बचाए गए नाविकों और मृतकों के पार्थिव शरीरों को जल्द ही भारत वापस लाया जाएगा।

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा:

सरकार के रुख पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

भले ही भारत ने अमेरिकी राजनयिक को तलब किया है, लेकिन विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयानों में सीधे तौर पर ‘अमेरिका’ का नाम लेने से बचने को लेकर देश के शीर्ष राजनयिकों और सामरिक विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई है।

  • पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने सरकार के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि हमें ‘प्रतिबंध’ या ‘नॉन-कंप्लायंस’ जैसे अमेरिकी तर्कों का इस्तेमाल करके इस अवैध कार्रवाई को सही ठहराने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। भारत और अमेरिका हिंद महासागर में मिलकर काम करते हैं, ऐसे में अमेरिकी सेना भारतीय जीवन के प्रति इतनी उदासीन नहीं रह सकती।
  • सामरिक विश्लेषक ब्रह्मा चेलानी ने सवाल उठाया कि अगर इस हवाई हमले में तीन अमेरिकी नागरिकों की मौत हो गई होती, तो वहां राजनीतिक संकट खड़ा हो जाता। लेकिन भारतीय नाविकों की मौत पर प्रधानमंत्री की चुप्पी और विदेश मंत्रालय का यह ‘रूटीन’ कूटनीतिक विरोध बेहद चिंताजनक है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर इस तरह का एकतरफा बल प्रयोग संयुक्त राष्ट्र चार्टर (UN Charter) के अनुच्छेद 2(4) और नौवहन की स्वतंत्रता

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