Saturday, June 13, 2026

अमेरिका-ईरान जंग का होगा ‘द एंड’? दुनिया की नजरें निर्णायक मोड़ पर

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तेहरान/वॉशिंगटन:

पिछले 3 महीने (28 फरवरी 2026) से मिडिल ईस्ट को दहलाने वाली अमेरिका और ईरान की जंग अब खत्म होने वाली है। दोनों देश एक बहुत बड़े शांति समझौते (Peace Deal) के बेहद करीब हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसका खुलासा किया है और सबसे बड़ा ट्विस्ट ये है कि डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस पोस्ट को री-पोस्ट करके इस पर मुहर लगा दी है!

अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक रहा, तो आने वाले सोमवार को इतिहास बदल सकता है और दोनों देश डील साइन कर सकते हैं।

ईरान का ’60 दिनों का चैलेंज’

ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने साफ शब्दों में कहा है कि यह एक ‘शुरुआती समझौता’ (Interim Deal) है। कहानी में ट्विस्ट ये हैं:

  • 60 दिन का टाइमर: शुरुआती समझौते के बाद अमेरिका को शर्तें पूरी करने के लिए सिर्फ 60 दिन मिलेंगे।
  • बातचीत का एंड: अगर अमेरिका मुकरा, तो डील हमेशा के लिए कैंसल और मिडिल ईस्ट में फिर से बारूद बरसने लगेगा।
  • रिमोट साइन: इस डील को ईरान की ‘सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद’ (SNSC) की हरी झंडी चाहिए होगी और दोनों नेता दूर से ही (रिमोटली) इस पर दस्तखत करेंगे।

ईरान की वो 5 शर्तें, जिसपर झुका अमेरिका!

  1. नो नाकेबंदी: होर्मुज स्ट्रेट से अमेरिकी नौसेना को अपनी नाकेबंदी तुरंत हटानी होगी।
  2. होर्मुज पर हक: होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान और ओमान का राज रहेगा। वहां से गुजरने वाले जहाजों से टैक्स तो नहीं, पर ‘सर्विस फीस’ वसूली जाएगी।
  3. जंग का हर्जाना: युद्ध के कारण ईरान को जो भी आर्थिक नुकसान हुआ है, अमेरिका उसकी भरपाई (मुआवजा) करेगा।
  4. फ्रीज प्रॉपर्टी आजाद: दुनिया भर में ईरान की जो भी संपत्ति जब्त या फ्रीज है, उसे तुरंत छोड़ना होगा।
  5. फुल सीजफायर: लेबनान और हिजबुल्लाह के खिलाफ चल रही जंग को हर मोर्चे पर पूरी तरह रोकना होगा।

यूरेनियम पर ईरान की ‘नो एंट्री’

परमाणु बम के मुद्दे पर ईरान ने अपने तेवर साफ रखे हैं। उन्होंने कहा कि परमाणु बातचीत दूसरे चरण में होगी, लेकिन ईरान अपना संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) किसी भी देश को नहीं देगा। जो भी प्रोसेस होगा, ईरान के अंदर ईरान खुद करेगा।

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