Friday, July 10, 2026

कर्नाटक PRC नोटिफिकेशन पर घमासान: केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र, “राष्ट्रीय सुरक्षा और संविधान के लिए गंभीर खतरा”

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नई दिल्ली / बेंगलुरु:

कर्नाटक सरकार द्वारा जारी किए गए ‘स्थानीय निवासी प्रमाणपत्र
नियम 2026′ को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव गहरा गया है। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने इस मामले में सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप की मांग की है।

अमित शाह को भेजे गए एक कड़े पत्र में, करंदलाजे ने कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार के इस नोटिफिकेशन को तुरंत वापस लेने या इसकी गहन कानूनी समीक्षा करने का आग्रह किया है। उन्होंने दावा किया है कि इस फैसले से देश की संप्रभुता, संवैधानिक ढांचे और राष्ट्रीय सुरक्षा के सामने “गंभीर और अपरिवर्तनीय चुनौतियां” खड़ी हो सकती हैं।

पत्र की 4 सबसे बड़ी और गंभीर बातें

केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने अपने पत्र में राज्य सरकार के इस कदम को पूरी तरह असंवैधानिक बताते हुए मुख्य रूप से चार बड़े कानूनी और सुरक्षा संबंधी मुद्दों को रेखांकित किया है:

  • एकल नागरिकता के संवैधानिक सिद्धांत का उल्लंघन

करंदलाजे ने तर्क दिया कि भारत का संविधान पूरे देश के लिए ‘एकल नागरिकता’ की व्यवस्था करता है। भारतीय संविधान के तहत किसी भी राज्य सरकार को यह अधिकार नहीं है कि वह अपने स्तर पर ‘स्थायी निवासी’ की कोई नई और विशेष श्रेणी तैयार करे। ऐसा करना भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों और राज्यों के बीच आवाजाही व निवास की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है।

  • राष्ट्रीय और आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा

पत्र में सबसे ज्यादा जोर सुरक्षा व्यवस्था पर दिया गया है। केंद्रीय मंत्री का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा बिना किसी कड़े कानूनी ढांचे और पर्याप्त जांच-पड़ताल के PRC जारी करने की यह प्रक्रिया बेहद खतरनाक है। उन्होंने अंदेशा जताया है कि इससे देश विरोधी तत्वों और संदिग्ध पृष्ठभूमि वाले लोगों को कानूनी रूप से राज्य में बसने का मौका मिल सकता है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।

  • अवैध घुसपैठियों और गैर-नागरिकों को लाभ मिलने की आशंका

शोभा करंदलाजे ने आरोप लगाया कि इस ढीले नोटिफिकेशन का फायदा उठाकर अवैध प्रवासियों और गैर-नागरिकों को बहुत आसानी से स्थानीय निवासी होने का प्रमाण पत्र मिल सकता है। एक बार यह सर्टिफिकेट मिलने के बाद, ये तत्व राज्य के सरकारी संसाधनों, कल्याणकारी योजनाओं और भूमि अधिकारों पर अवैध रूप से दावा ठोक सकेंगे।

  • प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग

केंद्रीय मंत्री का मानना है कि राज्य सरकार इस नोटिफिकेशन के जरिए अपनी प्रशासनिक सीमाओं का उल्लंघन कर रही है। नागरिकता, निवास और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े व्यापक मुद्दे पूरी तरह से केंद्र सरकार और संसद के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। राज्य सरकार द्वारा इस तरह का समानांतर नियम लाना संघीय ढांचे को कमजोर करता है।

पृष्ठभूमि:

वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोपों से जुड़ा है मामला

यह नया विवाद कर्नाटक में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम और मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया के बीच सामने आया है।चुनाव आयोग से भी शिकायत: गृह मंत्री को पत्र लिखने से पहले, शोभा करंदलाजे ने भारत निर्वाचन आयोग को भी एक शिकायत सौंपी थी।

क्या था आरोप?: उन्होंने आरोप लगाया था कि कर्नाटक में बूथ स्तर के अधिकारियों द्वारा नियमों के मुताबिक घर-घर जाकर वोटर्स का सत्यापन नहीं किया जा रहा है। इसके बजाय, कुछ खास सामुदायिक भवनों और कैंपों में बैठकर इस संवेदनशील प्रक्रिया को निपटाया जा रहा है, जिससे फर्जी वोटर्स के नाम शामिल होने की गुंजाइश बढ़ गई है।

आगे क्या हो सकता है?

शोभा करंदलाजे द्वारा देश के गृह मंत्री को सीधे पत्र लिखे जाने के बाद अब यह मामला पूरी तरह राजनीतिक और कानूनी रूप ले चुका है।जानकारों का मानना है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय इस मामले में कर्नाटक सरकार से रिपोर्ट तलब कर सकता है या फिर इस पूरे नोटिफिकेशन की कानूनी और संवैधानिक वैधता की जांच के लिए इसे विधि मंत्रालय के पास भेज सकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कर्नाटक की कांग्रेस सरकार और विपक्षी भाजपा के बीच जुबानी जंग और तेज होने के आसार हैं।

मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)

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