रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में चल रही विकास योजनाओं और सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बुनियादी ढांचे का निर्माण या कागजी आंकड़े तब तक बेमानी हैं, जब तक कि विकास की रोशनी समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति तक न पहुंच जाए।
मुख्यमंत्री ने विकास की वास्तविक परिभाषा को रेखांकित करते हुए कहा:
“विकास की असली पहचान तब बनती है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।”
‘अंतिम व्यक्ति’ पर केंद्रित है सरकार की नीतियां
मुख्यमंत्री का यह बयान उनकी सरकार की ‘आपकी योजना, आपकी सरकार, आपके द्वार’ जैसी महत्वाकांक्षी मुहिम को दर्शाता है। इस नीति के तहत सरकार सीधे गांवों और गरीब परिवारों तक पहुंच रही है, ताकि कल्याणकारी योजनाओं (जैसे पेंशन, राशन और रोजगार) का लाभ बिना किसी बिचौलिये के सीधे जरूरतमंदों को मिल सके।
समावेशी विकास पर जोर
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सीएम सोरेन का यह रुख यह साफ करता है कि सरकार केवल शहरी या औद्योगिक विकास तक सीमित नहीं रहना चाहती। सरकार का मुख्य फोकस सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों, आदिवासियों, दलितों और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों को मुख्यधारा में लाना है। जब समाज का सबसे कमजोर व्यक्ति सशक्त होगा, तभी राज्य का वास्तविक विकास संभव है
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi
