नई दिल्ली: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष के कुछ नेता पहले बिना पर्याप्त तथ्यों के आरोप लगाते हैं और बाद में अदालतों में जाकर सफाई या खेद जताने के लिए मजबूर हो जाते हैं। उन्होंने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल का भी जिक्र करते हुए दोनों नेताओं की तुलना की और विपक्ष की राजनीति पर सवाल उठाए। रिजिजू की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक मानहानि मामले में राहुल गांधी की ओर से ‘रेग्रेट’ (खेद) व्यक्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।
मीडिया से बातचीत के दौरान रिजिजू ने सवालिया लहजे में कहा कि अदालतों में सबसे अधिक माफी या खेद आखिर किसने जताया है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल दोनों कई मौकों पर अपने सार्वजनिक बयानों को लेकर कानूनी विवादों में घिरे और बाद में उन्हें अपने रुख में बदलाव करना पड़ा। रिजिजू ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में नेताओं को बयान देते समय तथ्यों की पुष्टि करनी चाहिए, क्योंकि बिना प्रमाण लगाए गए आरोप अंततः अदालत तक पहुंच जाते हैं।
रिजिजू ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट में स्पष्टीकरण और बिना शर्त माफी दे चुके हैं। उनका कहना था कि बार-बार ऐसी परिस्थितियां पैदा होना विपक्षी नेताओं की राजनीतिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पूरा मामला वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए एक बयान से जुड़ा है। राहुल गांधी ने उस समय कथित तौर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम पनामा पेपर्स प्रकरण से जोड़ दिया था। इसके बाद कार्तिकेय चौहान ने इसे अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताते हुए राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। मामला बाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंचा।
हाईकोर्ट में दायर अपने जवाब में राहुल गांधी की ओर से कहा गया कि संबंधित टिप्पणी कार्तिकेय चौहान के संदर्भ में नहीं थी और यदि उनके बयान से किसी तरह की गलतफहमी पैदा हुई है तो इस पर उन्हें खेद है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाने का उनका कोई इरादा नहीं था।
राहुल गांधी की ओर से खेद जताए जाने के बाद कार्तिकेय चौहान के पक्ष ने अदालत को बताया कि उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं है और वे मामले को समाप्त करने पर सहमत हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
इस घटनाक्रम के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर राजनीतिक हमला तेज कर दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष को आरोप लगाने से पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए, जबकि कांग्रेस की ओर से इस पूरे मामले पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की नजर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है, क्योंकि यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
