रायपुर:
देश और राज्य में स्मार्ट मीटर (Smart Meter) को लेकर चल रही तमाम चर्चाओं और शिकायतों के बीच एक नया और चौंकाने वाला सर्वे सामने आया है। इस सर्वे में यह बात तो साफ़ हुई है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं की बिजली खपत (Units Consumption) में गिरावट आई है, लेकिन इसके बावजूद उपभोक्ताओं के बिजली बिल में बढ़ोतरी क्यों दर्ज की जा रही है, इसकी असली वजह भी अब सार्वजनिक हो गई है।
खपत में कमी: स्मार्ट मीटर लगने और रियल-टाइम मॉनिटरिंग के कारण लोग बिजली के इस्तेमाल को लेकर सतर्क हुए हैं, जिससे औसत यूनिट खपत घटी है।
बिल बढ़ने के मुख्य कारण:
- सटीक रीडिंग (Accurate Billing): पुराने मीटरों की खराबी या अनुमानित बिलिंग (Estimated Billing) की जगह अब एक-एक यूनिट का सटीक हिसाब दर्ज हो रहा है।
- पुराना बकाया (Pending Arrears): पुराने सिस्टम के पेंडिंग बिल या एरियर का स्मार्ट मीटर बिलिंग में एडजस्ट होना।
- फिक्स्ड और सिस्टम चार्ज: फिक्स्ड चार्ज, सुरक्षा निधि (Security Deposit) और नया टैरिफ स्ट्रक्चर।
- पीक आवर्स टैरिफ: दिन और रात के समय के हिसाब से लगने वाले अलग-अलग दरें (Time of Day Tariff)।
छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया तेज़ गति से चल रही है। शुरुआत में उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी शिकायत यही थी कि स्मार्ट मीटर लगते ही उनका बिजली बिल अचानक बढ़ गया है।
हाल ही में किए गए सर्वे और बिजली विभाग के डेटा विश्लेषण में यह स्पष्ट हुआ है कि स्मार्ट मीटर लगने से उपभोक्ताओं में बिजली बचत को लेकर जागरूकता बढ़ी है। मोबाइल ऐप के जरिए रियल-टाइम खपत दिखने के कारण लोग अनावश्यक पंखे, एसी और लाइट बंद करने लगे हैं, जिससे वास्तविक यूनिट खपत में कमी दर्ज की गई है।
फिर बिल क्यों बढ़ रहे हैं?
सर्वे में सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक बिल बढ़ने के पीछे तकनीकी और प्रशासनिक कारण हैं:
- सटीक रीडिंग का असर: पुराने मैकेनिकल या डिजिटल मीटर समय के साथ धीमे हो जाते थे या कभी-कभी लाइनमैन अनुमानित बिल भेज देते थे। स्मार्ट मीटर से हर सेकेंड की खपत सीधे सर्वर तक पहुँचती है, जिससे कोई भी यूनिट छूटती नहीं है।
- एरियर और पेंडिंग एडजस्टमेंट: स्मार्ट मीटर चालू होते ही पिछला रुका हुआ बकाया या पुराना एरियर सिस्टम में अपने आप जुड़ जाता है, जिससे शुरुआती कुछ महीनों के बिल अधिक दिखाई देते हैं।
- टैक्स और एक्स्ट्रा चार्ज: बिल में केवल बिजली की दर ही नहीं, बल्कि फिक्स्ड चार्ज, फ्यूल एडजस्टमेंट चार्ज (VCA) और सेस भी शामिल होते हैं, जो खपत कम होने पर भी बिल की राशि बढ़ा देते हैं।
उपभोक्ताओं के लिए राहत और सुझाव
विभाग का कहना है कि शुरुआती एडजस्टमेंट के बाद जब पुराना बकाया चुकता हो जाता है, तब उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर का वास्तविक फायदा (कम बिल के रूप में) मिलने लगता है। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे अपने बिजली ऐप के ज़रिए ‘पीक आवर्स’ (अधिक लोड वाले समय) में भारी उपकरणों का इस्तेमाल कम करें ताकि बिल को और नियंत्रित किया जा सके।
