नई दिल्ली, 1 जुलाई: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (एक देश, एक चुनाव) के विषय पर अध्ययन दौरे के तहत राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सदस्यों का गर्मजोशी से स्वागत किया। भाजपा सांसद और समिति के अध्यक्ष पी. पी. चौधरी के नेतृत्व में यह संसदीय समिति देशभर के विभिन्न राज्यों और हितधारकों से इस महत्वपूर्ण विषय पर सुझाव व विचार जुटाने के लिए दौरे पर है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली सचिवालय में समिति के सदस्यों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर जोर देते हुए कहा:
संवैधानिक और प्रशासनिक पहलुओं की हो रही है समीक्षा
यह संयुक्त संसदीय समिति देश में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से जुड़े प्रस्तावों का व्यापक अध्ययन कर रही है। समिति का मुख्य उद्देश्य इस अवधारणा के निम्नलिखित प्रमुख पहलुओं का परीक्षण करना है:
- संवैधानिक और कानूनी: एक साथ चुनाव कराने के लिए जरूरी कानूनी बदलावों की समीक्षा।
- प्रशासनिक और वित्तीय: प्रशासनिक व्यवस्थाओं और इस प्रक्रिया से पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव का आकलन।
- हितधारकों से संवाद: विभिन्न राज्य सरकारों, विशेषज्ञों, संस्थानों और अन्य संबंधित पक्षों से सीधे सुझाव प्राप्त करना।
‘संतुलित और व्यापक रिपोर्ट तैयार करना हमारा लक्ष्य’
समिति के अध्यक्ष पी. पी. चौधरी ने दौरे के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि देशभर में विभिन्न राज्यों का दौरा करने के पीछे मुख्य मंशा अधिक से अधिक हितधारकों की राय जानना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विषय पर सभी पक्षों के विचारों को पूरी गंभीरता से सुना जा रहा है, ताकि समिति एक बेहद संतुलित और व्यापक रिपोर्ट तैयार कर सके।
इन मुख्य मुद्दों पर हुई चर्चा
दिल्ली सचिवालय में हुई इस बैठक के दौरान चुनावी प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित बनाने को लेकर कई अहम बिंदुओं पर चर्चा हुई, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- बार-बार होने वाले चुनावों के कारण प्रशासनिक एवं आर्थिक संसाधनों पर पड़ने वाला अत्यधिक प्रभाव।
- आचार संहिता और चुनाव प्रक्रियाओं के चलते विकास कार्यों की निरंतरता में आने वाली बाधाएं।
क्या है ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’?
आपको बता दें कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का प्रस्ताव देश में लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक निर्धारित समय सीमा के भीतर एक साथ कराने की अवधारणा पर आधारित है। वर्तमान संयुक्त संसदीय समिति इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए विभिन्न राज्यों का दौरा कर रही है, जिसके बाद वह अपनी अंतिम सिफारिशें संसद के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
