Tuesday, July 14, 2026

राजनीतिक विवादों के बीच निर्मला सीतारमण का बयान, ‘आलोचना लोकतंत्र का अहम हिस्सा

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कांचीपुरम: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद और विधानसभाओं की अहम भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि सरकार और विपक्ष के बीच सार्थक संवाद ही लोकतंत्र को मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि नीतिगत मतभेद और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का सबसे उपयुक्त मंच सदन है, जहां दोनों पक्ष अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रख सकते हैं।

तमिलनाडु के कांचीपुरम दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में वित्त मंत्री ने कहा कि विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना है, जबकि सरकार की जिम्मेदारी उन सवालों का जवाब देना और जनता के प्रति जवाबदेह बने रहना है। उनके अनुसार, स्वस्थ बहस और रचनात्मक संवाद से लोकतांत्रिक संस्थाएं अधिक मजबूत होती हैं।

निर्मला सीतारमण ने केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकारें विकास परियोजनाओं से जुड़े विस्तृत प्रस्ताव समय पर केंद्र को भेजती हैं, तो उन्हें तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य, शिक्षा, मेडिकल कॉलेजों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं के लिए केंद्र सरकार हर व्यवहारिक और जनहितकारी प्रस्ताव पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

आर्थिक प्रबंधन पर बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि किसी सरकार द्वारा कर्ज लेना अपने आप में नकारात्मक नहीं माना जाना चाहिए। असली महत्व इस बात का है कि उधार लिए गए संसाधनों का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है। यदि इनका निवेश बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और जनकल्याण कार्यक्रमों में किया जाता है, तो इसका सीधा लाभ आम नागरिकों को मिलता है और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।

उन्होंने कहा कि पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन और संसाधनों के प्रभावी उपयोग से विकास योजनाओं को अधिक गति मिलती है तथा सरकारी सहायता जरूरतमंद लोगों तक समय पर पहुंचाई जा सकती है।

अपने संबोधन के अंत में निर्मला सीतारमण ने कहा कि मजबूत लोकतंत्र की नींव पारदर्शिता, जवाबदेही और सरकार-विपक्ष के बीच सकारात्मक संवाद पर टिकी होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि यही सिद्धांत देश के समावेशी और दीर्घकालिक विकास को नई दिशा देंगे।

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