मुजफ्फराबाद/रावलाकोट:
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इस वक्त चिंगारी नहीं, बल्कि विद्रोह की पूरी आग धधक रही है। पाकिस्तानी हुकूमत और वहां की क्रूर सेना (Pakistan Army) के खिलाफ कश्मीरी आवाम अब आर-पार की जंग के मूड में है। स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को सीधी चुनौती देते हुए उनके पैरों तले से जमीन खिसका दी है।
38 दिन में 56 कश्मीरी मारे गए, शव तक नहीं सौंप रही पाक सेना
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पिछले महज 38 दिनों के भीतर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दी हैं। सेना की अंधाधुंध गोलीबारी और दमनकारी नीतियों के कारण 56 निहत्थे नागरिकों की हत्या कर दी गई है।
हद तो तब पार हो गई जब पाकिस्तानी सेना ने मारे गए लोगों के शव (लाशें) तक उनके परिवारों को नहीं सौंपे। इस अमानवीय हरकत ने पीओके की जनता के गुस्से को चरम पर पहुंचा दिया है।
“27 जुलाई को चुनाव नहीं होने देंगे…” – सरदार अमान खान की खुली चेतावनी
आवामी एक्शन कमेटी के दिग्गज नेता सरदार अमान खान ने पाकिस्तानी हुकूमत और सेना को ललकारते हुए कहा कि पीओके अब किसी भी तरह की गुलामी बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी दी:
“पीओके में 27 जुलाई को होने वाले चुनावों में अगर पाकिस्तान ने रत्ती भर भी धांधली या दखलअंदाजी करने की कोशिश की, तो वहां की जनता चुनाव ही नहीं होने देगी। हम पाकिस्तानी फौज को अपनी सरजमीं से खदेड़ कर दम लेंगे।”
अमान खान ने सेना प्रमुख आसिम मुनीर को खुली धमकी देते हुए कहा कि पीओके के लोगों को डराने और उनके बुनियादी हक छीनने का अंजाम पाकिस्तान के लिए बेहद बुरा होने वाला है। उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया कि पीओके पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है और यहाँ की आवाम अब आजादी की राह देख रही है।
क्यों भड़की है पीओके में बगावत?
- महंगाई और भारी टैक्स: आटे, बिजली और बुनियादी चीजों के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी से जनता त्रस्त है।
- सेना का अत्याचार: पाकिस्तानी सेना स्थानीय लोगों की जमीनों पर जबरन कब्जा कर रही है और आवाज उठाने वालों को गोलियों से भूना जा रहा है।
- अधिकारों का हनन: बोलने की आजादी छीन ली गई है और शांतिपूर्ण धरनों पर ड्रोन से आरडीएक्स (विस्फोटक) गिराने और आंसू गैस के गोले दागने की साजिशें रची जा रही हैं।
पाकिस्तान जिस पीओके को लेकर दुनिया के सामने ढोंग रचता था, आज वहीं की जनता पाकिस्तान की फौज के खिलाफ हथियार उठाने को मजबूर हो चुकी है। सरदार अमान खान की इस दहाड़ ने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी के मिलिट्री हेडक्वार्टर तक हड़कंप मचा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 27 जुलाई को होने वाले चुनावों को रोकने के लिए वहां की अवाम किस हद तक जाती है।
