Monday, August 24, 2026

पीओके में पाकिस्तान के खिलाफ बढ़ा जनाक्रोश, रावलकोट की रैली में ‘कब्जे’ के आरोप; आरक्षित सीटों के फैसले से शुरू हुआ विवाद

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नई दिल्ली/रावलकोट। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। स्थानीय लोगों का असंतोष अब राजनीतिक नारों और बड़े सार्वजनिक प्रदर्शनों के रूप में सामने आ रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो में प्रदर्शनकारी पाकिस्तान सरकार की नीतियों का विरोध करते दिखाई दे रहे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, पीओके के रावलकोट में आयोजित एक बड़ी जनसभा में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान कुछ नेताओं ने कहा कि पीओके को “आजाद कश्मीर” बताने का दावा वास्तविकता से मेल नहीं खाता और इसे पाकिस्तान के नियंत्रण वाला क्षेत्र बताया। प्रदर्शनकारियों ने क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति और स्थानीय अधिकारों को लेकर भी अपनी नाराजगी जताई।

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेता सरदार अमान खान का एक बयान भी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने कश्मीर को “कब्जे वाला क्षेत्र” बताते हुए पाकिस्तान की आधिकारिक नीति पर सवाल उठाए। उनके इस बयान के वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए जा रहे हैं।

पूर्व भारतीय वायुसेना अधिकारी एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) अनिल चोपड़ा ने भी सोशल मीडिया पर इन प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि पीओके में उठ रही आवाजें पाकिस्तान के लंबे समय से चले आ रहे नैरेटिव को चुनौती देती हैं। हालांकि, पाकिस्तान की ओर से इन दावों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आरक्षित सीटों के फैसले के बाद बढ़ा विवाद

जानकारी के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत तब हुई जब पाकिस्तान सरकार ने जम्मू-कश्मीर से विस्थापित लोगों के लिए पीओके विधानसभा में 12 विधायी सीटें आरक्षित करने की घोषणा की। स्थानीय संगठनों ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे क्षेत्र के लोगों के अधिकारों के खिलाफ बताया। इसके बाद प्रदर्शनों का दायरा बढ़ता गया और विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक मुद्दे भी आंदोलन का हिस्सा बन गए।

हिंसा में कई लोगों की मौत

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इन प्रदर्शनों के दौरान हुई झड़पों और हिंसा में सुरक्षाकर्मियों सहित कई लोगों की जान जा चुकी है। क्षेत्र में तनाव को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।

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