कोलकाता: प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बैंक खातों में जमा लगभग 440 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज किए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। तृणमूल कांग्रेस ने इस कार्रवाई को पूरी तरह “राजनीति से प्रेरित” करार देते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है।
TMC ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि पार्टी के सभी बैंक खाते, वित्तीय लेन-देन और चंदे से जुड़ी जानकारी पूरी तरह पारदर्शी है। पार्टी का दावा है कि प्रत्येक वित्तीय विवरण समय-समय पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और आयकर विभाग (Income Tax Department) के समक्ष नियमों के अनुसार प्रस्तुत किया जाता रहा है। ऐसे में बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई पूरी तरह अनुचित और विपक्ष को दबाने की कोशिश है।
पार्टी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए कर रही है। TMC का कहना है कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था और निष्पक्ष राजनीति के सिद्धांतों के खिलाफ है। पार्टी ने यह भी कहा कि वह इस मामले में कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है और उचित मंच पर अपना पक्ष रखेगी।
दूसरी ओर, प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि यह कार्रवाई धन शोधन (Money Laundering) से जुड़े एक मामले की जांच के तहत की गई है। ED के अनुसार, जांच के दौरान कुछ संदिग्ध वित्तीय लेन-देन सामने आए हैं। एजेंसी का दावा है कि पार्टी के खातों से लगभग 160 करोड़ रुपये एक निजी एविएशन कंपनी और उससे जुड़ी संस्थाओं को ट्रांसफर किए जाने के संकेत मिले हैं। इन्हीं लेन-देन की जांच के मद्देनज़र संबंधित बैंक खातों में जमा करीब 440 करोड़ रुपये की राशि को अस्थायी रूप से फ्रीज किया गया है।
ED का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और सभी पहलुओं की विस्तार से जांच की जा रही है। एजेंसी के अनुसार, कार्रवाई पूरी तरह कानून के प्रावधानों के तहत की गई है और जांच पूरी होने के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विपक्षी दल जहां इसे केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का उदाहरण बता रहे हैं, वहीं भाजपा का कहना है कि जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से कानून के अनुसार काम कर रही हैं और किसी भी भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितता की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
