Friday, July 10, 2026

राम मंदिर दान विवाद पर मायावती का बड़ा बयान, बोलीं- विपक्ष के पास ठोस सबूत हों, वरना यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी

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लखनऊ/नई दिल्ली: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर देश की राजनीति लगातार गरमाई हुई है। इस बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने इस पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए विपक्षी दलों को नसीहत दी है कि यदि उनके पास आरोपों के समर्थन में ठोस और विश्वसनीय सबूत हैं तो उन्हें सार्वजनिक करना चाहिए, अन्यथा ऐसे आरोप केवल राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाएंगे।

मायावती ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े किसी भी मामले को बेहद गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन या धन के उपयोग में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

बसपा प्रमुख ने साथ ही यह भी कहा कि केवल राजनीतिक लाभ हासिल करने के उद्देश्य से बिना पर्याप्त साक्ष्यों के आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने विपक्षी दलों से कहा कि यदि उनके पास वास्तव में पुख्ता प्रमाण हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों के सामने पेश करना चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। अन्यथा इस तरह के आरोपों को केवल राजनीतिक स्टंट या बयानबाजी माना जाएगा।

मायावती ने धार्मिक और आस्था से जुड़े मामलों को राजनीति से दूर रखने की भी अपील की। उनका कहना था कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर अनावश्यक राजनीतिक बयानबाजी से समाज में भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर चढ़ावे और दान के प्रबंधन के लिए अधिक पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद की संभावना कम हो और श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।

गौरतलब है कि अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर हाल के दिनों में विपक्ष लगातार सरकार और संबंधित ट्रस्ट पर सवाल उठा रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले में जांच शुरू करने की बात कही है। इसी बीच मायावती का यह बयान राजनीतिक बहस के बीच संतुलित रुख के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने एक ओर निष्पक्ष जांच की मांग की है तो दूसरी ओर बिना सबूत के लगाए जा रहे आरोपों से बचने की सलाह भी दी है।

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