रायपुर: छत्तीसगढ़ में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ जहां लाखों विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ स्कूलों की ओर रुख किया, वहीं शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस भी तेज हो गई है। राज्य सरकार द्वारा स्कूलों में प्रार्थना और दैनिक गतिविधियों के लिए जारी नए दिशा-निर्देशों ने शिक्षा को लेकर एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। सत्तारूढ़ भाजपा इसे भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और अनुशासन से जोड़कर देख रही है, जबकि कांग्रेस का आरोप है कि सरकार शिक्षा के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।
शाला प्रवेश उत्सव के तहत प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों का स्वागत तिलक, पुष्प और मिठाई के साथ किया गया। इसी बीच स्कूल शिक्षा विभाग के नए निर्देश लागू होने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं। नए प्रावधानों के अनुसार स्कूलों की प्रार्थना सभा में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के साथ सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र और दीप मंत्र को शामिल किया गया है। वहीं मध्याह्न भोजन से पहले भोजन मंत्र तथा छुट्टी के समय राज्य गीत के साथ गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का पाठ करने का सुझाव दिया गया है।
इन निर्देशों पर कांग्रेस ने सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी विद्यालयों में विभिन्न धर्मों और समुदायों के विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। ऐसे में किसी विशेष धार्मिक परंपरा से जुड़े मंत्रों को शामिल करना विवाद का विषय बन सकता है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि शिक्षा संस्थानों का फोकस बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक संसाधन और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने पर होना चाहिए।
विपक्ष ने राज्य में जारी गर्मी को भी मुद्दा बनाया है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि कई जिलों में अभी भी तापमान और उमस का प्रभाव बना हुआ है, जिससे छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि स्कूलों के संचालन की समय-सीमा तय करते समय मौसम की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए था।
इसके साथ ही पाठ्यपुस्तकों, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस का दावा है कि प्रदेश के कई विद्यालयों में विद्यार्थियों को अभी तक सभी आवश्यक सामग्री उपलब्ध नहीं हो पाई है, जिससे नए सत्र की शुरुआत प्रभावित हो सकती है।
दूसरी ओर भाजपा और राज्य सरकार ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। सरकार का कहना है कि प्रार्थना, मंत्र और सांस्कृतिक गतिविधियों का उद्देश्य किसी धर्म विशेष का प्रचार नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन, नैतिकता, सकारात्मक सोच और भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना है। भाजपा नेताओं का दावा है कि इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
