Wednesday, June 17, 2026

सांसदों का MSP ₹50 करोड़!” संजय राउत का सनसनीखेज दावा, महाराष्ट्र में फिर तेज हुई ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा

Share

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने विपक्षी खेमे पर बड़ा आरोप लगाते हुए दावा किया है कि सांसदों की “खरीद-फरोख्त” के लिए करोड़ों रुपये की पेशकश की जा रही है। उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में नए विवाद को जन्म दे दिया है और 2022 की बगावत की यादें फिर ताजा कर दी हैं।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा के एक सोशल मीडिया पोस्ट का जवाब देते हुए संजय राउत ने तीखा तंज कसा। उन्होंने लिखा कि सांसदों का “मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP)” अब ₹50 करोड़ तय हो चुका है और कथित तौर पर ₹15 करोड़ केवल एडवांस राशि के रूप में दिए जा रहे हैं। राउत ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि इन नेताओं की वास्तविक राजनीतिक कीमत इतनी नहीं है, बल्कि शिवसेना और टीएमसी जैसे दलों के “ब्रांड वैल्यू” की वजह से उनकी बोली बढ़ाई जा रही है।

  • ‘ऑपरेशन टाइगर’ क्या है?

महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों कथित “ऑपरेशन टाइगर” को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। दावा किया जा रहा है कि शिवसेना (UBT) के कई सांसद एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में हैं और संसद के मानसून सत्र से पहले बड़ा राजनीतिक फैसला ले सकते हैं। हालांकि इन दावों की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

  • उद्धव ठाकरे के साथ एकजुटता का दावा

संजय राउत ने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और हाल ही में सभी सांसदों ने उद्धव ठाकरे के साथ बैठक कर उनके नेतृत्व में भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों द्वारा जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है ताकि कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर किया जा सके।

  • शिंदे गुट ने आरोपों से किया किनारा

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट ने इस तरह के किसी भी “ऑपरेशन” से इनकार किया है। शिंदे गुट की नेता शाइना एनसी ने कहा कि उनकी पार्टी को किसी भी दल को तोड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं है और विपक्ष निराधार आरोप लगाकर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है।

  • 2022 की बगावत की फिर आई याद

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2022 में शिवसेना में हुए बड़े विभाजन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति अब भी पूरी तरह स्थिर नहीं हो सकी है। उस बगावत ने राज्य की सत्ता का समीकरण बदल दिया था और शिवसेना दो धड़ों में बंट गई थी।

ऐसे में सांसदों के संभावित दलबदल की खबरें स्वाभाविक रूप से राजनीतिक हलकों में चिंता और उत्सुकता दोनों बढ़ा रही हैं। यही वजह है कि हर बयान और हर राजनीतिक गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी जा रही है।

Read more

RNews