बेंगलुरु, 16 जून: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। इस बार कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने RSS पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि संविधान का सम्मान न करना “राष्ट्र के खिलाफ कार्य” माना जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने संगठन की वित्तीय पारदर्शिता और कानूनी जवाबदेही को लेकर कई सवाल भी उठाए।
- प्रियंक खड़गे के समर्थन में उतरे हरिप्रसाद
बीके हरिप्रसाद ने कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खड़गे के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें RSS से उसकी कानूनी स्थिति, फंडिंग के स्रोत और कर (टैक्स) अनुपालन की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गई थी।
उन्होंने कहा कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर संस्था को संविधान के दायरे में रहकर काम करना चाहिए और पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।
- “संविधान सर्वोपरि है”
मीडिया से बातचीत में हरिप्रसाद ने कहा कि देश का संविधान सर्वोच्च है और उसका सम्मान करना हर नागरिक और संगठन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि कोई संस्था संविधान के मूल्यों का सम्मान नहीं करती, तो यह देशहित के विपरीत माना जाएगा।
- RSS से पूछे गए प्रमुख सवाल
- RSS की कानूनी और वैधानिक स्थिति क्या है?
- संगठन के वित्तीय स्रोत क्या हैं?
- क्या संगठन कर नियमों का पूरी तरह पालन करता है?
- आय और व्यय का सार्वजनिक ब्योरा क्यों उपलब्ध नहीं कराया जाता?
- जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की व्यवस्था क्या है?
- RSS का पक्ष
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पहले भी ऐसे आरोपों और सवालों पर अपना पक्ष रख चुका है। संघ का कहना रहा है कि उसकी कार्यप्रणाली कानून के दायरे में है और उसकी स्थिति को लेकर आयकर विभाग तथा न्यायालयों के समक्ष आवश्यक स्पष्टता मौजूद है।
- बढ़ सकता है सियासी घमासान
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है। कांग्रेस इसे पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही का मुद्दा बना सकती है, जबकि भाजपा और RSS समर्थक इसे राजनीतिक हमला करार दे सकते हैं।