नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने पार्टी से इस्तीफा देने के अपने फैसले को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि उनके निर्णय के पीछे राजनीतिक कारणों के साथ-साथ निजी और आर्थिक जिम्मेदारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
प्रवक्ताओं को नहीं मिलता वेतन
शहज़ाद पूनावाला ने बताया कि पार्टी के प्रवक्ता के तौर पर काम करने वाले नेताओं को नियमित वेतन नहीं मिलता। ऐसे में रोजमर्रा के खर्चों और खासकर किराए जैसे आर्थिक दायित्वों को संभालना उनके लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन गया था।
उन्होंने संकेत दिया कि लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहने के दौरान निजी जिम्मेदारियों और आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था। इसी वजह से उन्होंने पार्टी से अलग होने का फैसला लिया।
राजनीतिक सफर पर भी की चर्चा
अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए पूनावाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश की राजनीति से जुड़े कई मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने अपने अनुभवों और राजनीतिक यात्रा के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
पूनावाला लंबे समय तक राजनीतिक बहसों और टीवी डिबेट्स में पार्टी का पक्ष मजबूती से रखने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं।
कांग्रेस में वापसी पर रखी शर्त
कांग्रेस को लेकर भी शहज़ाद पूनावाला ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस में वापसी पर तभी विचार करेंगे, जब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में बड़ा बदलाव हो।
उनके मुताबिक, राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को नेतृत्व की जिम्मेदारियों से हटाया जाए और कांग्रेस कुछ ऐतिहासिक मुद्दों को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगे, तभी वह पार्टी में लौटने के बारे में सोच सकते हैं।
इस्तीफे के बाद चर्चा तेज
शहज़ाद पूनावाला के बयान के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वह आगे किस राजनीतिक भूमिका में नजर आएंगे।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब उनके BJP से अलग होने के फैसले को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। पूनावाला ने अपने बयान के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि उनके फैसले के पीछे व्यक्तिगत, आर्थिक और राजनीतिक—तीनों तरह के पहलू रहे हैं।
