रांची: झारखंड सरकार की ओर से JPSC और JSSC की 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द किए जाने के फैसले के बाद राज्य में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। फैसले से प्रभावित चयनित अभ्यर्थी और नौकरी गंवाने के खतरे का सामना कर रहे कर्मचारी बुधवार को रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन के मुख्य द्वार पर बड़ी संख्या में जुटे और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
भारी बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारी रातभर मौके पर डटे रहे। सुबह प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़कर झारखंड मंत्रालय परिसर में प्रवेश करने की कोशिश की। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिसके दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।
‘हमारा क्या कसूर है?’—चयनित अभ्यर्थियों का सवाल
प्रदर्शन कर रहे चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने पूरी प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की, नियुक्ति हासिल की और अपनी सरकारी नौकरी ज्वाइन की। अब परीक्षा रद्द होने के फैसले से उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच की जाए, लेकिन बिना दोष साबित हुए चयनित उम्मीदवारों को सजा नहीं दी जानी चाहिए।
कई प्रदर्शनकारियों ने सरकार से नियुक्तियां रद्द करने का फैसला वापस लेने और प्रभावित कर्मचारियों को नौकरी पर बनाए रखने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नौकरी मिलने के बाद कई लोगों ने दूसरी नौकरियां छोड़ीं, कर्ज लिया और अपने परिवार की जिम्मेदारियां इसी नौकरी के भरोसे तय कीं।
2627 से ज्यादा कर्मचारियों की नौकरी पर संकट
सरकार के 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले का असर बड़ी संख्या में नियुक्त कर्मचारियों पर पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 2627 पदाधिकारी और कर्मचारियों की नौकरी पर संकट पैदा हो गया है। इनमें वे कर्मचारी भी शामिल हैं, जिन्हें संबंधित परीक्षाओं के आधार पर नियुक्ति मिल चुकी थी।
सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर यह बड़ा फैसला लिया है। इसके साथ ही 2014 से अब तक JPSC और JSSC के जरिए हुई 17 परीक्षाओं, उनके परिणामों और नियुक्तियों की जांच CID से कराने का निर्णय भी लिया गया है।
प्रोजेक्ट भवन के बाहर बढ़ा तनाव
फैसले के विरोध में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के प्रोजेक्ट भवन पहुंचने से प्रशासन के सामने भी चुनौती बढ़ गई है। प्रदर्शनकारी सरकार से तत्काल बातचीत और अपने भविष्य को लेकर स्पष्ट फैसला देने की मांग कर रहे हैं।
वहीं, दूसरी ओर JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों का दबाव भी सरकार पर बना हुआ है। ऐसे में सरकार के इस फैसले ने एक तरफ परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे छात्रों को राहत दी है, तो दूसरी तरफ पहले से चयनित और नियुक्त अभ्यर्थियों के सामने नौकरी बचाने का संकट खड़ा कर दिया है।
