Monday, August 24, 2026

गुरु पूर्णिमा पर वीरेन्द्र सिंह तोमर का संदेश— गुरु के बिना जीवन अधूरा

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रायपुर। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर क्षत्रिय करणी सेना के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह तोमर ने प्रदेशवासियों एवं समस्त सनातन समाज को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है और गुरु के मार्गदर्शन के बिना जीवन का वास्तविक उद्धार संभव नहीं है।

तोमर ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का दिवस है। इस दिन हमें अपने आध्यात्मिक, शैक्षणिक और जीवन को सही दिशा देने वाले सभी गुरुओं का सम्मान करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। महर्षि वेदव्यास ने वैदिक ज्ञान का संकलन कर उसे ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के रूप में विभाजित किया तथा अपने प्रमुख शिष्यों—सुमंतु, जैमिनी, वैशम्पायन और पैला—को इसका ज्ञान प्रदान किया। इसी महान योगदान के कारण उन्हें ‘व्यास’ की उपाधि प्राप्त हुई।

वीरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि गुरु पूर्णिमा का महत्व केवल सनातन धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि बौद्ध और जैन धर्म में भी यह पर्व विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि भगवान गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद सारनाथ में अपने पाँच पूर्व सहपाठियों को पहला उपदेश देकर धर्मचक्र प्रवर्तन की शुरुआत की थी। इसी दिन भिक्षु संघ की स्थापना भी हुई, जो बौद्ध धर्म के इतिहास की महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है।

उन्होंने जैन धर्म का उल्लेख करते हुए कहा कि परंपराओं के अनुसार भगवान महावीर ने कैवल्य ज्ञान प्राप्त करने के बाद गौतम स्वामी को अपना प्रथम गणधर (शिष्य) बनाया था। इसलिए जैन समाज में भी गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है और इस दिन गुरुजनों के प्रति श्रद्धा अर्पित की जाती है।

तोमर ने योग परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने प्रथम गुरु के रूप में सप्तऋषियों को योग का ज्ञान प्रदान किया था। इसलिए गुरु पूर्णिमा ज्ञान, साधना और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक पर्व है।

अंत में उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर अपने गुरुओं का सम्मान करें, उनके बताए मार्ग पर चलें तथा समाज में ज्ञान, संस्कार और सद्भाव की भावना को आगे बढ़ाएं।

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