Wednesday, October 14, 2026

माजीसा माँ के जन्मोत्सव पर वीरेंद्र सिंह तोमर ने मांगी सुख-शांति और समृद्धि

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रायपुर। माजीसा माँ के 338वें जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है। इस अवसर पर क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर ने माजीसा माँ को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए देश और प्रदेश के श्रद्धालुओं को जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने माजीसा माँ से सभी भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना की। साथ ही छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश की खुशहाली और निरंतर प्रगति की कामना की।

वीरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि माजीसा माँ के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशों में रहने वाले लोग भी उन्हें श्रद्धा के साथ पूजते हैं। उन्होंने माजीसा माँ के धाम के दर्शन के लिए रवाना होने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित और मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं दीं। तोमर ने यह भी कहा कि वे भविष्य में स्वयं माजीसा माँ के धाम पहुंचकर दर्शन करना चाहते हैं।

माजीसा माँ को राजस्थान की धार्मिक और लोक परंपराओं में रानी भटियानी सा, स्वरूप कंवर बाईसा, भुआसा, भुआजी, मोतियांवाली माँ और जसोल की धनियानी सहित विभिन्न नामों से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार उनका जन्म जैसलमेर जिले के जोगीदास गांव में स्वरूप कंवर के रूप में हुआ था। मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की सप्तमी, विक्रम संवत 1745 को उनका जन्म हुआ था। इसी परंपरा के आधार पर 2 सितंबर 1688 को माजीसा माँ का अवतरण दिवस माना जाता है। जोगीदास गांव जैसलमेर से करीब 85 किलोमीटर दूर बताया जाता है और वर्तमान में यह स्थान जोगीदास धाम के नाम से श्रद्धालुओं के बीच प्रसिद्ध है।

माजीसा माँ से जुड़ी परंपरागत कथा में जोगीदास गांव और भाटी राजवंश का विशेष उल्लेख मिलता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार जोगीदास का संबंध भाटी वंश से था और उन्हें क्षेत्र की जागीर प्राप्त हुई थी। लोक परंपरा में जोगीदास को गांव का पहला जागीरदार भी बताया जाता है। मान्यता के अनुसार लंबे समय तक संतान नहीं होने पर उन्होंने भाटी वंश की कुलदेवी मां स्वांगिया जी की आराधना की। इसके बाद विक्रम संवत 1745 में उनके यहां कन्या का जन्म हुआ, जिसका नाम नौवें दिन स्वरूप कंवर रखा गया।

परंपरागत कथा के अनुसार स्वरूप कंवर का विवाह जसोल के रावल कल्याण सिंह से हुआ। विवाह के बाद उन्हें रानी सा के रूप में सम्मान मिला और भाटी वंश से संबंध होने के कारण वे रानी भटियानी सा के नाम से प्रसिद्ध हुईं। माजीसा माँ से जुड़ी लोककथाओं में उनके पुत्र लालसिंह और पारिवारिक जीवन से जुड़े कई प्रसंग मिलते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार पुत्र की असमय मृत्यु के बाद स्वरूप कंवर को गहरा आघात लगा और उन्होंने अन्न-जल त्याग दिया। मान्यता है कि 22 जनवरी 1719 को माघ शुक्ल पक्ष द्वितीया के दिन स्वरूप कंवर ने अपने पुत्र को गोद में लेकर देह त्याग दी। इसके बाद उन्हें देवी स्वरूप मानकर पूजा किए जाने की परंपरा मजबूत हुई।

माजीसा माँ से जुड़ी लोककथाओं में मंगणियार रामा का प्रसंग भी प्रमुखता से मिलता है। मान्यता के अनुसार रामा जसोल पहुंचे थे और बाद में कागा श्मशान घाट में उन्होंने माजीसा माँ की आराधना की। इसी दौरान उन्हें मां के दर्शन होने और उनके माध्यम से मायके जोगीदास में संदेश पहुंचाने की लोककथा प्रचलित है। इस कथा में सोने के आभूषण, वस्त्र और मिश्री से जुड़े प्रसंग भी बताए जाते हैं। ये सभी घटनाएं धार्मिक मान्यताओं और लोककथाओं का हिस्सा हैं।

माजीसा माँ की पूजा के प्रमुख केंद्रों में जसोल और जोगीदास धाम का विशेष स्थान माना जाता है। जसोल में उनकी स्मृति से जुड़ा धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। वहीं जोगीदास में भी लंबे समय से माजीसा माँ की पूजा की परंपरा चली आ रही है। जोगीदास धाम में माँ स्वरूप कंवर और उनके पुत्र लालसिंह की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा 23 अक्टूबर 1999 को किए जाने की जानकारी मिलती है। इसके बाद 13 अक्टूबर 2008 को साँवाईसिंह की मूर्ति की भी प्राण प्रतिष्ठा की गई।

माजीसा माँ के 338वें जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना और स्मरण के साथ परिवार एवं समाज के कल्याण की कामना की। वीरेंद्र सिंह तोमर ने भी इस अवसर पर माजीसा माँ को नमन करते हुए सभी श्रद्धालुओं के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश की खुशहाली और प्रगति के लिए प्रार्थना की तथा माजीसा माँ के धाम की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षित एवं मंगलमय यात्रा की कामना की।

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