Sunday, July 12, 2026

कर्नाटक कांग्रेस में अनुशासन पर सख्त संदेश, प्रियांक खरगे ने किया पार्टी अध्यक्ष के रुख का समर्थन

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बेंगलुरु। कर्नाटक कांग्रेस में हाल के दिनों में सामने आई नारेबाजी और अंदरूनी खींचतान को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा सार्वजनिक कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाए जाने के मामले पर अब उनके पुत्र और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है और संगठन के निर्णयों का सम्मान सभी कार्यकर्ताओं को करना चाहिए।

दरअसल, हाल ही में आयोजित एक कांग्रेस कार्यक्रम के दौरान कुछ कार्यकर्ता लगातार एक वरिष्ठ नेता के समर्थन में नारे लगा रहे थे। मंच से कई बार शांति बनाए रखने की अपील किए जाने के बावजूद जब नारेबाजी जारी रही, तो पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नाराजगी जताते हुए कार्यकर्ताओं को फटकार लगाई। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।

प्रियांक खरगे का स्पष्ट संदेश

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियांक खरगे ने कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक संगठन है, लेकिन लोकतंत्र का अर्थ अनुशासनहीनता नहीं होता। उन्होंने कहा कि किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में पार्टी की गरिमा और संगठनात्मक मर्यादा बनाए रखना हर कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है।

संगठन को व्यक्ति से ऊपर रखने का संकेत

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मल्लिकार्जुन खरगे की प्रतिक्रिया केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह पार्टी के भीतर बढ़ रही गुटबाजी और व्यक्तिगत राजनीति के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश था। कांग्रेस नेतृत्व यह संकेत देना चाहता है कि संगठन किसी भी व्यक्ति विशेष से बड़ा है और पार्टी की एकजुटता सबसे महत्वपूर्ण है।

कर्नाटक कांग्रेस में क्यों बढ़ी चर्चा?

कर्नाटक की राजनीति में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के समर्थकों के बीच प्रतिस्पर्धा की चर्चाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में सार्वजनिक मंच पर हुई नारेबाजी और उसके बाद पार्टी अध्यक्ष की नाराजगी को राजनीतिक विश्लेषक बड़े संदर्भ में देख रहे हैं।

आलाकमान का सख्त रुख

प्रियांक खरगे के बयान के बाद यह साफ संकेत माना जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व संगठन में अनुशासन को लेकर किसी भी प्रकार की ढिलाई देने के पक्ष में नहीं है। पार्टी के भीतर एकजुटता बनाए रखने और कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश देने के लिए शीर्ष नेतृत्व सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने कर्नाटक कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व का रुख और संगठनात्मक गतिविधियां इस बहस को नई दिशा दे सकती हैं।

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