मुंबई/अयोध्या: राम मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार और सत्तारूढ़ दल पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि मंदिर ट्रस्ट से जुड़े धन के इस्तेमाल को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित तौर पर ट्रस्ट के पैसों का उपयोग राजनीतिक गतिविधियों, यहां तक कि विपक्षी सांसदों की खरीद-फरोख्त के लिए भी किया गया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राउत ने कहा कि भगवान राम के नाम पर देशभर के श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ दान दिया, लेकिन अब उसी धन के प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर गंभीर संदेह पैदा हो गए हैं। उनके मुताबिक, यदि दान राशि के उपयोग का स्पष्ट और सार्वजनिक हिसाब उपलब्ध नहीं है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
राउत ने यह भी दावा किया कि शिवसेना की ओर से मंदिर निर्माण के लिए 4 किलोग्राम चांदी की ईंट और एक करोड़ रुपये का दान दिया गया था। उनका कहना है कि इतने वर्षों बाद भी न तो इस दान की कोई आधिकारिक रसीद उपलब्ध कराई गई और न ही चांदी की ईंट का कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड सामने आया। उन्होंने सवाल उठाया कि दान की गई सामग्री और राशि का विवरण आखिर कहां है।
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब अयोध्या के पूर्व समाजवादी पार्टी विधायक पवन पांडे ने मंदिर में प्राप्त दान राशि के प्रबंधन में करोड़ों रुपये की कथित गड़बड़ी का आरोप लगाया। शिकायत के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।
प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने दान राशि की गिनती और प्रबंधन से जुड़े आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियां अब वित्तीय लेन-देन, दान के रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की विस्तार से जांच कर रही हैं ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
मामला अब सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है। अदालत में दायर याचिका में CBI की निगरानी में विशेष जांच दल से राम मंदिर ट्रस्ट के खातों और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की गई है।
वहीं, विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा है कि भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और जांच के आधार पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब पूरे मामले में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
