जयपुर/नई दिल्ली:
कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने सामाजिक कार्यकर्ता व पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ तीखा रुख अख्तियार किया है। वांगचुक को भूख हड़ताल से जबरन हटाए जाने की घटना की कड़ी निंदा करते हुए पायलट ने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने के लिए ‘तानाशाही’ का रास्ता अपना रही है।
“जनसमर्थन से घबरा गई है सरकार” — पायलट का आरोप
सचिन पायलट ने कहा कि सोनम वांगचुक की चिंताओं और मांगों को सुलझाने में केंद्र सरकार पूरी तरह नाकाम रही है। उन्होंने दावा किया कि आगामी संसद सत्र से पहले वांगचुक के ‘संसद मार्च’ को देश भर के युवाओं और नागरिकों से जो भारी जनसमर्थन मिल रहा था, उससे सरकार बुरी तरह घबरा गई। इसी बौखलाहट में बातचीत का रास्ता चुनने के बजाय उन्हें जबरन अनशन स्थल से हटा दिया गया, जो पूरी तरह अलोकतांत्रिक है।
NEET पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई
वांगचुक के मुद्दे के साथ-साथ सचिन पायलट ने युवाओं से जुड़े नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर भी केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया। देश के लाखों छात्रों के भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ का हवाला देते हुए उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की अपनी मांग को एक बार फिर पुरजोर तरीके से दोहराया।
राजस्थान की भजनलाल सरकार पर भी निशाना
केंद्र के अलावा, पायलट ने अपने गृह राज्य राजस्थान की भाजपा सरकार पर भी हमला बोलने का मौका नहीं छोड़ा। राज्य में स्थानीय निकाय और अन्य स्थानीय चुनावों को टाले जाने के फैसले पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार जनता का सामना करने से डर रही है, इसीलिए लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और स्थानीय चुनावों को टालने का काम किया जा रहा है।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi
