नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान राशि में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मामले पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को घेरते हुए निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इतनी बड़ी कथित वित्तीय गड़बड़ी केवल निचले स्तर के कर्मचारियों द्वारा की जा सकती है या इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया में प्रियंका गांधी ने कहा कि यदि दान से जुड़े सीसीटीवी कैमरे बंद किए गए और करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी हुई, तो इसकी जिम्मेदारी केवल छोटे कर्मचारियों पर नहीं डाली जा सकती। उन्होंने कहा कि जांच केवल औपचारिकता बनकर नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पड़ताल होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
उन्होंने यह भी कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
इसी बीच, विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने कथित वित्तीय अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, टिन्नू यादव और मनीष यादव समेत कई लोगों के नाम शामिल हैं।
समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडेय ने आरोप लगाया है कि राम मंदिर के दान में लगभग 7.5 करोड़ से 27 करोड़ रुपये तक की कथित वित्तीय अनियमितता हुई है। इन आरोपों की जांच के लिए राज्य सरकार ने 14 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। फिलहाल जांच जारी है और मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
