नई दिल्ली:
देश में चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। पाँच राज्यों में SIR की शुरुआत होते ही सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आर-पार की जंग छिड़ गई है। चुनाव आयोग के इस कदम के खिलाफ पूरा विपक्ष एकजुट हो गया है। DMK और आम आदमी पार्टी (AAP) समेत 23 विपक्षी दलों और एक निर्दलीय राज्यसभा सांसद ने सीधे देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) का दरवाजा खटखटाया है।
विपक्षी नेताओं ने CJI को एक साझा पत्र भेजकर इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिसके बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है।
विपक्ष का बड़ा आरोप: ‘खतरे में है लोकतंत्र, CJI तुरंत दखल दें’
विपक्षी खेमे ने मुख्य न्यायाधीश को भेजे संयुक्त पत्र में चुनाव आयोग की नीयत और SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सीधे उंगली उठाई है। विपक्ष का मुख्य एजेंडा है:
- निष्पक्षता पर सवाल: विपक्ष का दावा है कि मतदाता सूची संशोधन (Voter List Revision) की इस हड़बड़ी भरी प्रक्रिया से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रभावित हो सकते हैं।
- लोकतंत्र को खतरा: पत्र में कहा गया है कि अगर इस समय कोर्ट ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है।
- CJI से अपील: विपक्षी दलों ने चीफ जस्टिस से मांग की है कि वे इस मामले का संज्ञान लें और चुनाव आयोग की इस कार्रवाई पर जरूरी दिशा-निर्देश जारी करें।
DMK और AAP के साथ से विपक्ष हुआ ‘सुपर मजबूत’
राजनीतिक गलियारों में इस चिट्ठी से ज्यादा चर्चा विपक्ष की ‘एकजुटता’ की हो रही है। हाल के दिनों में कई मुद्दों पर अलग-थलग दिखने वाली DMK और अरविंद केजरीवाल की AAP ने इस पत्र पर हस्ताक्षर कर यह साफ कर दिया है कि चुनावी मोर्चे पर वे पूरी तरह एकजुट हैं। रणनीतिकारों का मानना है कि 24 सांसदों/दलों का यह साझा कदम आगामी चुनावों से पहले बीजेपी के खिलाफ एक बड़े ‘मेगा अलायंस’ की नींव हो सकता है।
BJP का तीखा पलटवार: ‘हार के डर से रोना रो रही है कांग्रेस’
विपक्ष की इस घेराबंदी पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी जोरदार पलटवार किया है। बीजेपी ने इस पूरे विवाद के पीछे कांग्रेस को मास्टरमाइंड बताते हुए तीखा हमला बोला:
SIR’ यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह कानूनी मोर्चे पर भी देश की सबसे बड़ी अदालत के दहलीज तक पहुंच चुका है। एक तरफ विपक्ष इसे लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई कह रहा है, तो दूसरी तरफ सत्तापक्ष इसे नियमों के तहत होने वाली सामान्य प्रक्रिया बता रहा है।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस संयुक्त पत्र पर CJI और सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख रहता है, क्योंकि कोर्ट के फैसले से ही तय होगा कि पाँच राज्यों में चल रही यह चुनावी प्रक्रिया किस दिशा में जाएगी।
