चेन्नई:
तमिलनाडु की राजनीति में कावेरी जल विवाद (Cauvery Water Dispute) एक बार फिर पूरी तरह गरमा गया है। राज्य की कमान संभालने के बाद पहली बार मुख्यमंत्री विजय इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों के सीधे निशाने पर आ गए हैं।
DMK समेत कई विपक्षी दलों ने की सर्वदलीय बैठक की मांग
सत्तारूढ़ सरकार पर दबाव बनाते हुए मुख्य विपक्षी दल डीएमके (DMK) समेत कई अन्य राजनीतिक दलों ने राज्य सरकार से तत्काल सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting) बुलाने की मांग की है। विपक्ष का तर्क है कि कावेरी नदी के पानी के अधिकार की रक्षा के लिए राज्य के सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर एक साझा रणनीति (Common Strategy) तैयार करनी चाहिए।
राज्य सरकार का रुख: “विपक्ष कर रहा है राजनीति”
हालांकि, तमिलनाडु सरकार ने फिलहाल किसी भी तरह की सर्वदलीय बैठक आयोजित करने से साफ इनकार कर दिया है। सरकार की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया है कि:
- राजनीतिक लाभ की कोशिश: विपक्ष का उद्देश्य इस मुद्दे का वास्तविक समाधान खोजना नहीं है, बल्कि वह इसके जरिए केवल राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है।
- मजबूत कानूनी व प्रशासनिक स्थिति: सरकार का दावा है कि वह राज्य और किसानों के हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक और प्रभावी कदम उठा रही है।
- राजनीतिक तापमान बढ़ा: कावेरी विवाद को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
- किसानों की चिंता: जल संकट और कावेरी नदी के पानी के बंटवारे का असर सीधे कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है, जिससे किसान संगठन भी सरकार के अगले कदम पर नजर बनाए हुए हैं।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hind
