Monday, July 13, 2026

पवन खेड़ा का केंद्र पर निशाना: ईरान-अमेरिका समझौते में भारत की गैरमौजूदगी चिंताजनक

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नई दिल्ली, 15 जून: ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत करते हुए कांग्रेस ने केंद्र सरकार की विदेश नीति को लेकर तीखे सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि यह समझौता वैश्विक शांति की दिशा में सकारात्मक कदम है, लेकिन इतने महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम में भारत की सक्रिय भूमिका दिखाई न देना चिंता का विषय है।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच यह समझौता राहत की उम्मीद लेकर आया है। हालांकि, उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भारत, जो कभी वैश्विक कूटनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाने के लिए जाना जाता था, इस पूरे घटनाक्रम में दर्शक की भूमिका तक सीमित दिखाई दिया।

  • “भारत की आवाज क्यों नहीं सुनाई दी?”

पवन खेड़ा ने कहा कि रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर और तुर्की जैसे देशों ने बातचीत और मध्यस्थता की प्रक्रिया में भूमिका निभाई, जबकि भारत की भागीदारी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में भारत से अधिक सक्रिय कूटनीतिक पहल की अपेक्षा की जाती है।

  • वैश्विक शांति का स्वागत, लेकिन सवाल भी

कांग्रेस ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि ईरान-अमेरिका समझौते का स्वागत किया जाना चाहिए क्योंकि इससे क्षेत्र में स्थिरता आने की संभावना है। पार्टी का मानना है कि लंबे समय से जारी तनाव के कारण पश्चिम एशिया के कई देशों को मानवीय और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है।

खेड़ा ने कहा कि यदि यह समझौता स्थायी शांति का रास्ता खोलता है, तो यह पूरी दुनिया के हित में होगा।

  • विदेश नीति पर सरकार को घेरा

कांग्रेस नेता ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के पुराने बयानों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने अंतरराष्ट्रीय विवादों में मध्यस्थता की संभावनाओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।

उनका कहना था कि भारत की विदेश नीति केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि वैश्विक संकटों में रचनात्मक हस्तक्षेप और संवाद की भूमिका भी निभानी चाहिए।

  • पाकिस्तान का जिक्र क्यों?

पवन खेड़ा ने दावा किया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान भारत की कूटनीतिक सक्रियता के कारण पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जाता था। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में पाकिस्तान स्वयं को क्षेत्रीय स्थिरता और शांति समर्थक देश के रूप में प्रस्तुत करने में सफल होता दिखाई दे रहा है।

हालांकि, यह कांग्रेस का राजनीतिक आकलन है और इस पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • “भारत सीधे पक्षकार नहीं था, फिर भी भूमिका अहम थी”

कांग्रेस ने यह भी माना कि ईरान और अमेरिका के बीच का यह संघर्ष सीधे तौर पर भारत से जुड़ा हुआ विवाद नहीं था। इसके बावजूद पार्टी का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा, प्रवासी भारतीयों के हित और पश्चिम एशिया में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को देखते हुए नई दिल्ली की सक्रियता अधिक दिखाई देनी चाहिए थी।

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