नई दिल्ली:
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने दिल्ली में यमुना के बाढ़ क्षेत्र (Floodplain) के सीमांकन को लेकर लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध पर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया है कि वे दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (I&FC) सहित संबंधित एजेंसियों की संयुक्त बैठक एक सप्ताह के भीतर बुलाकर विवाद का समाधान सुनिश्चित करें।
यमुना के बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन पर्यावरण संरक्षण, बाढ़ प्रबंधन और अतिक्रमण हटाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि विभिन्न विभागों के बीच तकनीकी मतभेद और समन्वय की कमी के कारण यह प्रक्रिया लंबे समय से अटकी हुई है। इसी देरी पर NGT ने नाराजगी जताते हुए जल्द समाधान के निर्देश दिए हैं।
ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि संबंधित सभी विभाग मिलकर सीमांकन मानचित्र में मौजूद विसंगतियों को दूर करें और तय समयसीमा के भीतर प्रगति रिपोर्ट दाखिल करें। NGT का मानना है कि बाढ़ क्षेत्र का वैज्ञानिक और सटीक सीमांकन भविष्य में अतिक्रमण रोकने, पर्यावरण संरक्षण और बाढ़ के जोखिम को कम करने के लिए आवश्यक है।
यह मामला दिल्ली में यमुना के बाढ़ क्षेत्र के संरक्षण और अनधिकृत निर्माणों को हटाने से जुड़ी चल रही कार्यवाही का हिस्सा है। NGT पहले भी इस प्रक्रिया में हो रही देरी पर चिंता जता चुका है और संबंधित एजेंसियों को समयबद्ध तरीके से कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दे चुका है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीमांकन का कार्य समय पर पूरा हो जाता है, तो यमुना के बाढ़ क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत होगी, अवैध निर्माणों पर प्रभावी कार्रवाई संभव होगी और दिल्ली में बाढ़ प्रबंधन की तैयारियों को भी मजबूती मिलेगी।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)
