अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े कथित विवाद की जांच के बीच मामला लगातार नया मोड़ लेता जा रहा है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई के साथ-साथ अब इस प्रकरण को लेकर सामाजिक और कानूनी स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच कुछ संगठनों की ओर से राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा और पूर्व महासचिव चंपत राय को तीन दिन के भीतर अयोध्या छोड़ने की चेतावनी दिए जाने का दावा सामने आया है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि प्रशासन या जांच एजेंसियों की ओर से नहीं की गई है।
मामले की जांच कर रही पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) हर पहलू की गहन पड़ताल में जुटे हैं। जांच के तहत ट्रस्ट से जुड़े लोगों सहित करीब 140 व्यक्तियों के बयान दर्ज किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। चंपत राय का बयान पहले ही दर्ज किया जा चुका है, जबकि अनिल मिश्रा, गोपाल राव और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ जारी है।
सूत्रों के अनुसार जांच अब केवल मंदिर में प्राप्त चढ़ावे की गिनती तक सीमित नहीं है। दानराशि के संग्रह, उसके रिकॉर्ड, बैंकिंग प्रक्रिया और वित्तीय लेनदेन की भी विस्तार से जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां संबंधित दस्तावेजों का मिलान कर रही हैं और कुछ बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।
इसी बीच अयोध्या बार एसोसिएशन की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस मामले के आरोपियों की पैरवी कोई भी सदस्य अधिवक्ता नहीं करेगा। एसोसिएशन ने कहा कि यदि कोई सदस्य इस निर्णय का उल्लंघन करता है तो उसके विरुद्ध संगठनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि बैंक रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों की जांच पूरी होने के बाद ही मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो आगे और लोगों से पूछताछ या आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
अनिल मिश्रा और चंपत राय को अयोध्या छोड़ने की चेतावनी संबंधी जानकारी कुछ संगठनों के दावे पर आधारित है। इस संबंध में प्रशासन अथवा जांच एजेंसियों की ओर से आधिकारिक पुष्टि होना शेष है।
