नई दिल्ली/चंडीगढ़:
पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही लीडरशिप की लड़ाई अब आर-पार के मूड में आ चुकी है। पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरनजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और सांसद नई दिल्ली में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल से एक अहम मुलाकात करने जा रहे हैं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों और आलाकमान द्वारा लिए गए हालिया फैसलों के खिलाफ असंतोष को लेकर बुलाई गई है।
विवाद की मुख्य वजह: राजा वड़िंग की दोबारा ताजपोशी
पंजाब कांग्रेस में मचे इस बवाल की असल वजह 1 जुलाई को आलाकमान द्वारा लिया गया वह फैसला है, जिसके तहत अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को दोबारा पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए रखने का ऐलान किया गया था।
- चरनजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेता इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं।
- चन्नी खेमे की मांग है कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन किया जाए और चन्नी को पंजाब कांग्रेस की कमान सौंपी जाए।
- चन्नी को पार्टी में कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाया गया था, लेकिन वह इससे संतुष्ट नहीं हैं।
दिल्ली दरबार से पहले चन्नी-बाजवा की सीक्रेट मीटिंग
वेणुगोपाल से मिलने दिल्ली रवाना होने से ठीक पहले, बुधवार को चरनजीत सिंह चन्नी ने पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) प्रताप सिंह बाजवा के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की थी। इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि बाजवा ने भी हाल ही में दिल्ली में केसी वेणुगोपाल से मुलाकात की थी।
चन्नी खेमे को सुखजिंदर सिंह रंधावा, राणा गुरजीत सिंह और परगट सिंह जैसे कई दिग्गज नेताओं का खुलकर समर्थन मिल रहा है। सोशल मीडिया पर बागी नेताओं द्वारा “सारा पंजाब चन्नी नाल” (पूरा पंजाब चन्नी के साथ) कैंपेन भी चलाया जा रहा है।
भूपेश बघेल की रिपोर्ट: क्या टल जाएगी बगावत?
इस पूरे विवाद के बीच, पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल ने 6 दिनों तक चंडीगढ़ और पंजाब के अलग-अलग नेताओं से मुलाकात करने के बाद अपनी एक गोपनीय रिपोर्ट केसी वेणुगोपाल को सौंप दी है।
सूत्रों के हवाले से बड़ी बात:
बघेल की रिपोर्ट में राजा वड़िंग को ही अध्यक्ष पद पर बनाए रखने की वकालत की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के 29 जिला अध्यक्षों में से 25 और 7 लोकसभा सांसदों में से 4 सांसद पूरी तरह वड़िंग के साथ हैं। दिल्ली में वेणुगोपाल से मिलने के बाद बघेल ने कड़े तेवर दिखाते हुए मीडिया से कहा, “नेतृत्व बदलना कोई बच्चों का खेल नहीं है।”
भले ही प्रभारी भूपेश बघेल ने यह संकेत दे दिए हों कि लीडरशिप में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन चन्नी गुट का दिल्ली में डेरा डालना यह साफ करता है कि बागी नेता इतनी आसानी से पीछे हटने वाले नहीं हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) और बीजेपी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरने से पहले कांग्रेस आलाकमान के सामने पंजाब में अपनी ही पार्टी की कलह को शांत करने की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI
