तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। महिलाओं से जुड़ी एक प्रमुख कल्याणकारी योजना के भुगतान, लाभार्थियों के चयन और उसके क्रियान्वयन को लेकर सदन में जमकर आरोप-प्रत्यारोप हुए। विपक्ष ने सरकार पर गरीब महिलाओं के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने दावा किया कि वह योजना को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए समीक्षा कर रही है।
विपक्षी विधायक ए.सी. मोइदीन ने भुगतान में कथित देरी का मुद्दा उठाते हुए काम रोको प्रस्ताव पेश किया। इसके बाद सदन में योजना के संचालन, पात्र लाभार्थियों और भुगतान प्रक्रिया को लेकर लंबी चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी कल्याणकारी योजना को बंद नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ वास्तविक और पात्र लोगों तक पहुंचे। उन्होंने पूर्ववर्ती एलडीएफ सरकार पर चुनाव के समय योजनाओं को जल्दबाजी में लागू करने का आरोप भी लगाया और कहा कि वर्तमान सरकार पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के लिए इस वर्ष के बजट में 1,770 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही लाभार्थियों की सूची की समीक्षा कर किसी भी संभावित अनियमितता की निष्पक्ष जांच कराने की बात भी कही।
विपक्ष के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने सरकार के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि योजना को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार समीक्षा के नाम पर योजना को कमजोर करने का प्रयास कर रही है, जिससे गरीब और जरूरतमंद महिलाओं के हित प्रभावित हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनावी वादों को समयबद्ध तरीके से पूरा करना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने महिलाओं के लिए केएसआरटीसी बसों में मुफ्त यात्रा जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री के जवाब के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष का काम रोको प्रस्ताव खारिज कर दिया। हालांकि, इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव अभी भी जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में भी केरल की राजनीति का प्रमुख विषय बना रह सकता है
