Friday, June 5, 2026

21 जिंदगियां निगल गई होटल की आग, गले लगे मिले पति-पत्नी के शव

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दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लरिश स्टे होटल में 3 जून को लगी भीषण आग ने 21 लोगों की जान ले ली। मृतकों में एक अफ्रीकी दंपती भी शामिल था, जिनके शव बाथरूम में एक-दूसरे को गले लगाए हुए मिले। बचाव दल के अनुसार महिला टॉयलेट सीट पर बैठी थी, जबकि उसका पति पास रखी कुर्सी पर था। दोनों ने एक-दूसरे को कसकर पकड़ा हुआ था और महिला का सिर पति के कंधे पर टिका था। दम घुटने से दोनों की मौत हो गई।

स्थानीय लोगों के मुताबिक यह दंपती संतान प्राप्ति की उम्मीद लेकर दिल्ली आया था। दोनों पास के अस्पताल में टेस्ट ट्यूब बेबी (IVF) प्रक्रिया के लिए ठहरे हुए थे। हादसे ने उनकी जिंदगी की उम्मीदों को दर्दनाक अंत में बदल दिया।

इस अग्निकांड में जान गंवाने वाली 61 वर्षीय लाइबेरियाई नागरिक जेनजे एन. रोलैंड की भी पहचान कर ली गई है। उनके बीमार पति पहले से मैक्स अस्पताल में भर्ती थे। एक रिश्तेदार ने एम्स मोर्चुरी पहुंचकर शव की पहचान की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार हादसे में मरने वालों में 13 विदेशी नागरिक शामिल हैं।

  • होटल मालिक का चौंकाने वाला जवाब – ‘दिल्ली में सब चलता है’

हादसे के मुख्य आरोपी और होटल मालिक लवकेश बजाज को अदालत ने चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पूछताछ के दौरान जब उससे छह कमरों के लाइसेंस पर 25 कमरे चलाने और फायर एनओसी न होने के बारे में सवाल किया गया तो उसने कथित तौर पर कहा, “दिल्ली में सब चलता है।”

पुलिस जांच में सामने आया है कि होटल तीन साझेदारों द्वारा संचालित किया जा रहा था और इनके दिल्ली में कई अन्य होटल व गेस्ट हाउस भी हैं। पर्यटन विभाग का लाइसेंस जय मिश्रा के नाम पर जारी था।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आग लगने के दौरान लवकेश बजाज अपनी कार से जलती हुई इमारत के पास से गुजरा था, लेकिन डर के कारण मौके से भाग गया। उसने न तो राहत कार्य में मदद की और न ही प्रशासन को तत्काल सूचना दी। पुलिस के अनुसार वह पूरे दिन शहर में इधर-उधर घूमता रहा।

  • हादसा होने की 5 बड़ी वजह
  • खिड़कियां बंद थीं। वेंटिलेशन नहीं था। आने-जाने का सिर्फ एक रास्ता था। जगह काफी सकरी थी। बाहरी फायर एस्केप (आपातकालीन निकास) की कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसी इमारतें ‘चिमनी’ जैसी बन जाती हैं, धुआं-गर्मी कुछ ही सेकंड में ऊपर पहुंच जाती है।
  • प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, सेंसर आधारित मुख्य गेट बंद हो गया था। इसकी वजह से लोग बाहर ही नहीं निकल पाए।
  • स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम जैसे जरूरी फायर सेफ्टी उपकरण काम नहीं कर रहे थे।
  • ग्राउंड फ्लोर पर कई भारी एलपीजी सिलेंडर रखे गए थे, जिनके लिए कोई फायर-आइसोलेशन सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी।

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