नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने कहा है कि देश की इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति केवल वाहनों की खरीद पर मिलने वाली छूट और प्रोत्साहन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य भारत में स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करना है। सरकार के अनुसार, EV नीति के तहत मैन्युफैक्चरिंग, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी टेक्नोलॉजी और पूरे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
केंद्र ने बताया कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई स्तरों पर काम कर रही है। इसमें उपभोक्ताओं को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ देश में EV चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार, घरेलू निर्माण क्षमता बढ़ाना और नई तकनीकों को अपनाना शामिल है।
सरकार का कहना है कि भविष्य की परिवहन व्यवस्था को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए केवल वाहन खरीद को बढ़ावा देना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए मजबूत सप्लाई चेन, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योगों के बीच तालमेल जरूरी है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को ऊर्जा सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और हरित विकास से भी जोड़ा जा रहा है।
केंद्र की योजनाओं में इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, बसों और अन्य वाहनों को बढ़ावा देने के लिए मांग आधारित प्रोत्साहन भी शामिल हैं। इसके अलावा, EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए अलग-अलग पहल शुरू की गई हैं, ताकि लोगों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का भरोसा बढ़ सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में EV का भविष्य केवल सब्सिडी पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि एक मजबूत इकोसिस्टम के निर्माण पर आधारित होगा। बेहतर चार्जिंग सुविधा, सस्ती बैटरी तकनीक और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ने से देश में स्वच्छ परिवहन को नई गति मिल सकती है।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)
