Sunday, July 12, 2026

जंतर-मंतर पर ‘लाइब्रेरी’ पहल को लेकर विवाद, CJP संस्थापक ने छात्रों से मारपीट का लगाया आरोप

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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन स्थल के पास लाइब्रेरी बनाने की एक पहल को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस ने दो छात्रों के साथ कथित तौर पर मारपीट की, जब वे प्रदर्शनकारियों के लिए एक छोटी लाइब्रेरी स्थापित कर रहे थे। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।

अभिजीत दिपके ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कुछ तस्वीरें और वीडियो साझा किए हैं, जिनमें दो छात्रों के शरीर पर कथित चोट के निशान दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि ये छात्र जंतर-मंतर पर आने वाले प्रदर्शनकारियों के लिए किताबों की एक छोटी लाइब्रेरी तैयार कर रहे थे। इस पहल का उद्देश्य लोगों को शांतिपूर्ण माहौल में पढ़ने के लिए प्रेरित करना और विरोध-प्रदर्शन के दौरान संवाद एवं जागरूकता को बढ़ावा देना था।

दिपके का आरोप है कि लाइब्रेरी की व्यवस्था के दौरान दिल्ली पुलिस मौके पर पहुंची और छात्रों को वहां से हटाने का प्रयास किया। इसी दौरान कथित तौर पर दोनों छात्रों के साथ मारपीट की गई, जिससे उन्हें चोटें आईं। उन्होंने कहा कि किसी भी शांतिपूर्ण और रचनात्मक पहल के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।

सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो और तस्वीरों के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने घटना पर चिंता जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति तभी स्पष्ट होगी, जब दिल्ली पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आएगा।

समाचार लिखे जाने तक दिल्ली पुलिस की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। पुलिस की प्रतिक्रिया आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनास्थल पर वास्तव में क्या हुआ और कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई।

जंतर-मंतर लंबे समय से देश में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख स्थल रहा है, जहां विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और नागरिक संगठनों द्वारा समय-समय पर प्रदर्शन किए जाते हैं। ऐसे में इस घटना ने एक बार फिर विरोध-प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक स्थानों के उपयोग और पुलिस की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

फिलहाल यह मामला आरोप और प्रत्यारोप के स्तर पर है। साझा किए गए वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं, लेकिन उनके आधार पर घटना की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि आधिकारिक जांच और संबंधित पक्षों के बयानों के बाद ही हो सकेगी।

यदि दिल्ली पुलिस इस मामले पर अपना पक्ष जारी करती है या जांच में कोई नई जानकारी सामने आती है, तो घटनाक्रम की तस्वीर और अधिक स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल इस मामले ने सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक विमर्श तक लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

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