Sunday, July 12, 2026

तमिलनाडु में नई नियुक्ति पर बढ़ा विवाद, कनिमोझी ने विजय सरकार को घेरा K. वेंकट नारायणन की नियुक्ति पर उठे सवाल

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चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में राज्य के विशेष प्रतिनिधि (Special Representative) के पद पर हुई नई नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की सांसद कनिमोझी ने मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और संभावित हितों के टकराव (Conflict of Interest) को मुद्दा बनाया है।

कनिमोझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए पूछा कि क्या तमिलनाडु में इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए कोई योग्य व्यक्ति उपलब्ध नहीं था। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में राज्य के विशेष प्रतिनिधि का पद केवल औपचारिक नहीं, बल्कि मंत्री स्तर की जिम्मेदारी वाला पद है, जिसका मुख्य कार्य केंद्र सरकार के समक्ष तमिलनाडु के अधिकारों और हितों की प्रभावी पैरवी करना होता है।

नियुक्ति पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

विवाद की मुख्य वजह यह है कि विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किए गए के. वेंकट नारायणन मूल रूप से कर्नाटक से संबंध रखते हैं और वह KVN Productions के चेयरमैन हैं। यही कंपनी मुख्यमंत्री विजय की आगामी फिल्म ‘जन नायकन’ की सह-निर्माता भी है। विपक्ष का आरोप है कि इस कारण नियुक्ति पर हितों के टकराव की आशंका पैदा होती है और सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

बीजेपी ने भी किया विरोध

इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी ने भी सरकार को घेरा है। तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने नियुक्ति की आलोचना करते हुए कहा कि राज्य के इतने महत्वपूर्ण पद पर ऐसा फैसला कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।

विवाद बढ़ने के बाद तमिलनाडु सरकार ने सफाई देते हुए कहा कि के. वेंकट नारायणन की नियुक्ति अस्थायी (Temporary) आधार पर की गई है। सरकार के अनुसार, वह सीमित अवधि के लिए इस पद की जिम्मेदारी संभालेंगे और यह व्यवस्था केवल प्रशासनिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए की गई है।

राजनीतिक बहस तेज

कनिमोझी की आलोचना और बीजेपी के विरोध के बाद यह नियुक्ति तमिलनाडु की राजनीति में नया विवाद बन गई है। विपक्ष सरकार से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सरकार अपने फैसले को प्रशासनिक आवश्यकता बता रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

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