पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को पीलीभीत में एक जनसभा को संबोधित करते हुए विपक्ष पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। सीएम योगी ने देश के विभाजन और बांग्लादेश के गठन जैसी ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र करते हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि तत्कालीन सत्ता लोलुपता और गलत नीतियों के कारण देश को विभाजन का दंश झेलना पड़ा, जिसका खामियाजा करोड़ों निर्दोष नागरिकों ने भुगता।
इतिहास से सीखें सबक: राष्ट्रहित सर्वोपरि
सीएम योगी ने बांग्लादेश के गठन और उपमहाद्वीप के बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों का उदाहरण देते हुए कहा कि गलत नीतियों के परिणाम दूरगामी होते हैं। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि इतिहास को केवल किताबों में पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि उससे सबक लेने के लिए याद रखा जाना चाहिए।
- राजनीतिक स्वार्थ बनाम राष्ट्रहित: जब भी राष्ट्रहित के ऊपर राजनीतिक स्वार्थ को रखा जाता है, समाज को उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है।
- राष्ट्रीय एकता: आज देश को एक ऐसी सोच की जरूरत है जो राष्ट्रीय सुरक्षा, अखंडता और सामाजिक समरसता को केंद्र में रखकर काम करे।
सपा पर तुष्टिकरण और अनदेखी का आरोप
कांग्रेस के साथ-साथ सीएम योगी के निशाने पर समाजवादी पार्टी भी रही। उन्होंने सपा पर हमला बोलते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा दिया। विभाजन से प्रभावित लोगों और विस्थापितों की पीड़ा को इन दलों ने कभी गंभीरता से नहीं लिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “सरकारों का दायित्व किसी विशेष वर्ग या वोट बैंक की राजनीति करना नहीं, बल्कि देश के सभी नागरिकों के हितों की समान रूप से रक्षा करना है।”
सुरक्षा, विकास और सांस्कृतिक गौरव पर जोर
अपने संबोधन के समापन में मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश सरकार के विजन को दोहराया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार राज्य में सख्त कानून-व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे देश की एकता को मजबूत करने में अपना योगदान दें ताकि भविष्य में ऐसी किसी त्रासदी की पुनरावृत्ति न हो।
राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज: सीएम योगी के इस कड़े रुख और बयानों के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विभाजन, तुष्टिकरण और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों को उठाकर मुख्यमंत्री ने आगामी राजनीतिक बिसात बिछा दी है। अब देखना यह है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी इस चौतरफा हमले पर क्या पलटवार करती हैं।
