Wednesday, October 14, 2026

CGPSC घोटाला: पेपर लीक के नाम पर 3 करोड़ की वसूली का आरोप, ईडी की कई ठिकानों पर छापेमारी

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रायपुर, 3 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की वर्ष 2020-21 की राज्य सेवा परीक्षा में कथित पेपर लीक, अनियमितता और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की। ईडी की रायपुर जोनल टीम ने रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर में कुल पांच ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया।

जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में परीक्षा के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झांसा देकर उम्मीदवारों से कथित तौर पर बड़ी रकम वसूली गई। ईडी ने जांच में 3 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित आय का पता चलने की बात कही है। मामले में उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार किया गया है और ईडी को 5 सितंबर तक उससे पूछताछ की अनुमति मिली है।

दो FIR के आधार पर आगे बढ़ी जांच

ईडी ने बताया कि यह कार्रवाई रायपुर में दर्ज दो एफआईआर के आधार पर आगे बढ़ाई गई है। इन एफआईआर में CGPSC की वर्ष 2020 और 2021 में आयोजित राज्य सेवा परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताओं और हेरफेर के आरोप लगाए गए थे।

मामले में CGPSC के तत्कालीन अध्यक्ष टमन सिंह सोनवानी समेत अन्य लोगों के खिलाफ भी जांच चल रही है।

मोबाइल और बैंक खातों से मिले अहम सुराग

जांच एजेंसी के मुताबिक इससे पहले 3 जून को भी तलाशी अभियान चलाया गया था। उस दौरान उत्कर्ष चंद्राकर के मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्यों, बैंक खातों से संबंधित जानकारी और पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों का विश्लेषण किया गया।

ईडी का कहना है कि इन डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों की जांच के दौरान कथित लेन-देन और रकम के स्रोत से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।

प्रश्नपत्र दिलाने का झांसा देकर वसूली का आरोप

ईडी के अनुसार, CGPSC परीक्षा के प्रश्नपत्र कथित तौर पर कुछ रिश्तेदारों, चुनिंदा उम्मीदवारों और बिचौलियों तक गैरकानूनी तरीके से पहुंचाने का दावा किया गया था। जांच में सामने आया कि उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने कथित रूप से उम्मीदवारों को लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाकर उनसे पैसे लिए।

जांच एजेंसी के मुताबिक, इस तरीके से करीब 3 करोड़ रुपये की अपराध से प्राप्त आय अर्जित किए जाने के संकेत मिले हैं।

मामा के नाम और प्रभाव का इस्तेमाल करने का आरोप

ईडी ने आरोप लगाया है कि उत्कर्ष चंद्राकर ने नौकरी के उम्मीदवारों को प्रभावित करने और उनसे पैसे वसूलने के लिए अपने मामा केके चंद्रवंशी, जो तत्कालीन मुख्यमंत्री के पर्सनल असिस्टेंट बताए गए हैं, के नाम, पद और प्रभाव का इस्तेमाल किया।

जांच एजेंसी के अनुसार, इस दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय में तत्कालीन ओएसडी के नाम और कथित प्रभाव का भी इस्तेमाल किया गया। इन आरोपों की जांच ईडी द्वारा की जा रही है।

पांच ठिकानों से दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त

मंगलवार की कार्रवाई के दौरान ईडी ने पांच ठिकानों से कई महत्वपूर्ण सामग्री जब्त करने की जानकारी दी है। इनमें आपत्तिजनक दस्तावेज, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस, वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति से संबंधित दस्तावेज समेत अन्य साक्ष्य शामिल हैं।

ईडी के मुताबिक, जब्त सामग्री और सामने आए वित्तीय लेन-देन का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। एजेंसी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है।

5 सितंबर तक ईडी की पूछताछ

मामले में गिरफ्तार उत्कर्ष चंद्राकर से ईडी पूछताछ कर रही है। एजेंसी को 5 सितंबर तक उससे पूछताछ की अनुमति मिली है। पूछताछ के दौरान कथित पेपर लीक से जुड़े नेटवर्क, पैसों के लेन-देन और अन्य संभावित लोगों की भूमिका को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है।

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