नई दिल्ली। दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के बीच देश में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत प्रमुख वैश्विक नेताओं की मौजूदगी को लेकर भाजपा ने इसे भारत के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और मजबूत कूटनीतिक स्थिति का संकेत बताया है। वहीं विपक्षी दलों ने सम्मेलन के दावों और इसके वास्तविक परिणामों को लेकर सवाल उठाए हैं।
BJP ने बताया भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत
भाजपा नेताओं का कहना है कि BRICS जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच पर दुनिया की प्रमुख शक्तियों के नेताओं की मौजूदगी भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाती है। पार्टी का मानना है कि नई दिल्ली में इतने बड़े स्तर पर सम्मेलन का आयोजन देश की कूटनीतिक क्षमता और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को मजबूती देता है।
भाजपा की ओर से सम्मेलन को भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया जा रहा है, जहां वैश्विक मुद्दों पर देश अपनी प्राथमिकताओं और दृष्टिकोण को मजबूती से सामने रख सकता है।
विपक्ष ने सम्मेलन के नतीजों पर उठाए सवाल
वहीं एनसीपी (एसपी) और टीएमसी समेत विपक्षी दलों ने सम्मेलन को लेकर अलग रुख अपनाया है। विपक्ष का कहना है कि केवल बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और उनके दौरान किए जाने वाले दावों से विकास की तस्वीर स्पष्ट नहीं होती। सरकार को यह बताना चाहिए कि ऐसे आयोजनों का देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और आम जनता की जिंदगी पर वास्तविक असर क्या पड़ रहा है।
विपक्षी नेताओं ने जमीनी विकास और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने की जरूरत पर जोर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर मखाना और सत्तू की चर्चा
BRICS सम्मेलन के दौरान बिहार के स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने की कोशिश भी चर्चा में है। मखाना और सत्तू जैसे पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के कदम की सराहना की जा रही है।
इस पहल को स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने और देश के अलग-अलग क्षेत्रों की आर्थिक क्षमता को वैश्विक मंच पर सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शिवसेना (UBT) ने की राजनीति से बचने की अपील
इधर शिवसेना (UBT) ने BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण आयोजन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी से बचने की अपील की है। पार्टी का कहना है कि भारत से जुड़े इतने बड़े वैश्विक आयोजन को दलगत राजनीति से अलग रखते हुए देश के हित और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भूमिका को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
BRICS सम्मेलन के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के अलग-अलग रुख से यह साफ है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से लेकर घरेलू विकास तक, सम्मेलन को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।
