लखनऊ/नई दिल्ली:
उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी बिसात बिछाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी कमर कस ली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति के तहत इस बार पार्टी का मुख्य फोकस उन सीटों पर है, जहां पिछले चुनाव में पार्टी को शिकस्त झेलनी पड़ी थी या जो लंबे समय से अभेद्य किला बनी हुई हैं। बीजेपी ने राज्य की सभी विधानसभा सीटों को लेकर एक बेहद कड़ा और वैज्ञानिक फॉर्मूला तैयार किया है।
182 ‘मुश्किल’ सीटों के लिए विशेष रणनीति
बीजेपी के इस नए चुनावी प्लान के केंद्र में कुल 182 सीटें हैं, जिन्हें पार्टी इस बार हर हाल में अपने पाले में लाना चाहती है:
- हार वाली 121 सीटें: बीजेपी का सबसे मुख्य फोकस उन 121 सीटों पर है, जहां साल 2022 के विधानसभा चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा था।
- 61 ‘सबसे मुश्किल’ सीटें: इसके साथ ही उन 61 सीटों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है, जहां पार्टी पिछले लगातार तीन चुनावों से एक बार भी जीत का स्वाद नहीं चख सकी है।
A, B, C और D कैटेगरी में बंटी सीटें, नए सिरे से सर्वे शुरू
अमित शाह की रणनीति के तहत राज्य की सभी सीटों को उनकी संवेदनशीलता और जीतने की संभावना के आधार पर A, B, C और D कैटेगरी में बांटा गया है। इन श्रेणियों के आधार पर:
- बूथ स्तर पर नए सिरे से ग्राउंड फीडबैक जुटाया जा रहा है।
- क्षेत्र के जातीय समीकरणों और सोशल इंजीनियरिंग का नए सिरे से गहन सर्वे किया जा रहा है, ताकि विपक्ष के गढ़ में सेंध लगाई जा सके।
अब बड़ा चेहरा होना टिकट की गारंटी नहीं!
इस बार बीजेपी आलाकमान ने साफ संदेश दे दिया है कि केवल ‘बड़ा चेहरा’ या ‘रसूख’ होने से किसी भी नेता को टिकट की गारंटी नहीं मिलेगी। इस बार टिकट वितरण में सिर्फ और सिर्फ परफॉर्मेंस (कामकाज और जनता के बीच छवि) को ही एकमात्र पैमाना बनाया जाएगा। आंतरिक सर्वे में जो उम्मीदवार पूरी तरह ‘विनेबिलिटी’ (जीतने की क्षमता) के पैमाने पर खरा उतरेगा, पार्टी केवल उसी को मैदान में उतारेगी।
बीजेपी का यह आक्रामक और जमीनी फॉर्मूला निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश की सियासत में विपक्षी दलों की चिंता बढ़ाने वाला है।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi
