अयोध्या:
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने एक बड़ा और अभूतपूर्व आध्यात्मिक निर्णय लिया है। राम मंदिर के कथित चढ़ावा विवाद और जारी एसआईटी (SIT) जांच के बीच, चंपत राय आगामी 25 जुलाई से 21 नवंबर (2026) तक अयोध्या में ही रहकर पहली बार ‘चातुर्मास’ करने का संकल्प ले चुके हैं।
अयोध्या से बाहर नहीं जाएंगे चंपत राय, शुरू किया एकांतवास
इस 4 महीने की अवधि के दौरान चंपत राय अयोध्या की सीमा से बाहर नहीं जाएंगे। मिली जानकारी के अनुसार, वह 23 जून से ही तीर्थ क्षेत्र भवन में एकांतवास पर हैं। इस दौरान उनका पूरा समय निम्नलिखित धार्मिक गतिविधियों में बीतेगा:
- प्रभु श्री राम के मंत्रों का जाप और ध्यान।
- रामचरितमानस का नियमित पाठ, विशेष साधना और तप।
- पूरी तरह से सात्विक और अनुशासित जीवनचर्या।
- फिलहाल वह प्रतिदिन कई घंटे पूजा-अर्चना में बिता रहे हैं और केवल बेहद सीमित लोगों से ही मुलाकात कर रहे हैं।
विवाद के बीच शुद्धिकरण और प्रायश्चित अनुष्ठान
चंपत राय के इस फैसले की चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर हुए कथित विवाद की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) कर रही है। मंदिर की मर्यादा, शुद्धिकरण और पवित्रता बनाए रखने के लिए ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि भी इस समय प्रायश्चित अनुष्ठान कर रहे हैं। वैदिक विद्वानों और पंडितों की देखरेख में मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान भी आयोजित किए जा रहे हैं।
SIT की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार
जहाँ एक तरफ ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारी आध्यात्मिक साधना और अनुष्ठानों के जरिए मंदिर की शुचिता को बल दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की गहन जांच जारी है। अब सभी की निगाहें एसआईटी (SIT) की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके बाद ही इस कथित विवाद की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi
