नई दिल्ली:
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने नए एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड (AoRs) को संबोधित करते हुए वकीलों को सोशल मीडिया के प्रति आगाह किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वकालत के पेशे में पहचान सोशल मीडिया पर मिलने वाली सस्ती लोकप्रियता से नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत, ईमानदारी और कानूनी दक्षता से बनती है।
“लाइक्स और फॉलोअर्स सफलता का पैमाना नहीं”
युवा और नए वकीलों को सलाह देते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि उन्हें ऑनलाइन चर्चा या सोशल मीडिया पर मशहूर होने के पीछे भागने के बजाय अपने पेशेवर कौशल और कानूनी ज्ञान को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश के संबोधन की प्रमुख बातें:
- असली सम्मान अदालत से: CJI ने कहा कि सोशल मीडिया पर मशहूर होना किसी वकील की विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। एक वकील को असली सम्मान और पहचान अदालत के भीतर उसके द्वारा किए गए ठोस काम से ही मिलती है।
- सोशल मीडिया मैट्रिक्स से बचें: वकीलों को अपनी सफलता या काबिलियत का पैमाना लाइक्स, फॉलोअर्स या वर्चुअल दुनिया की चर्चाओं को नहीं बनाना चाहिए।
- मेहनत ही असली उपलब्धि: उनके अनुसार, एक वकील के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि वही है जो वह अदालत, अपने मुवक्किलों (Clients) और साथी वकीलों के बीच अपनी मेहनत और ईमानदार काम के जरिए हासिल करता है।
CJI की यह नसीहत ऐसे समय में आई है जब डिजिटल दौर में कई युवा कानून पेशेवर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश में लगे रहते हैं। उन्होंने युवा वकीलों को अपने पेशे की गरिमा और निष्ठा बनाए रखने का संदेश दिया
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi
