विशाखापत्तनम / नई दिल्ली:
भारतीय नौसेना की ताकत और समुद्री सुरक्षा को और अधिक अभेद्य बनाने की दिशा में शनिवार को एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया गया। पूर्ण रूप से स्वदेशी तकनीक से निर्मित अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट INS महेंद्रगिरि को औपचारिक रूप से नौसेना के युद्धपोत बेड़े में शामिल (Commissioned) कर लिया गया है।
विशाखापत्तनम में आयोजित एक बेहद गरिमामय और भव्य समारोह में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस शक्तिशाली युद्धपोत का कमीशनिंग समारोह संपन्न कराया और इसे राष्ट्र को समर्पित किया।
प्रोजेक्ट-17A का आधुनिक योद्धा
INS महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट-17A की ‘नीलगिरि श्रेणी’ का एक बेहद आधुनिक और शक्तिशाली स्टेल्थ फ्रिगेट (Stealth Frigate) है। इस युद्धपोत की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्टेल्थ तकनीक है, जिसकी वजह से यह दुश्मन के रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आता। आधुनिक हथियारों, सेंसर और उन्नत तकनीक से लैस यह युद्धपोत समंदर में किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम है।
‘ आत्मनिर्भर भारत अभियान की बड़ी उपलब्धि’ — रक्षा मंत्री
युद्धपोत को नौसेना में शामिल करने के बाद देश को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि INS महेंद्रगिरि का नौसेना के बेड़े में शामिल होना ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ की एक बहुत बड़ी और गौरवशाली उपलब्धि है।
उन्होंने भारतीय इंजीनियरों और डिजाइनरों की तारीफ करते हुए कहा:
“यह आधुनिक युद्धपोत हमारी स्वदेशी रक्षा तकनीक, भारतीय नौसैनिक क्षमता और देश के रक्षा उद्योग की बढ़ती ताकत का जीता-जागता प्रतीक है। ऐसे अत्याधुनिक और शक्तिशाली युद्धपोत भारत की समुद्री सीमाओं और सुरक्षा को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत करेंगे।”
देश की बढ़ती समुद्री ताकत
हिंद महासागर और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में बढ़ते खतरों को देखते हुए INS महेंद्रगिरि का नौसेना में शामिल होना भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक जीत माना जा रहा है।
यह पूरी तरह से ‘मेक इन इंडिया’ के तहत देश में ही डिजाइन और निर्मित किया गया है, जो वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती तकनीकी और सैन्य शक्ति को दर्शाता है।
