नई दिल्ली: ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी द्वारा लड़कियों की शादी की उम्र को लेकर दिए गए एक बयान पर देश में नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया है कि भारत किसी धार्मिक कानून (शरीयत) से नहीं, बल्कि देश के संविधान से चलता है।
क्या है पूरा मामला?
मौलाना साजिद रशीदी ने हाल ही में एक बयान में दावा किया था कि लड़कियों की शादी में देरी होने से देश में बलात्कार जैसे अपराध बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस्लाम में लड़की के बालिग (प्यूबर्टी) होने पर ही शादी की सलाह दी जाती है। हालांकि, विवाद बढ़ने पर मौलाना रशीदी ने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है और वह बाल विवाह का समर्थन नहीं कर रहे थे, बल्कि केवल सामाजिक सुधार की बात कर रहे थे।
भाजपा नेताओं का कड़ा पलटवार
- बाबूलाल मरांडी (झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता):
“जो लोग भारतीय संविधान के अनुसार देश में नहीं रहना चाहते, उन्हें देश छोड़ देना चाहिए। अगर मौलाना रशीदी को भारतीय संविधान से परेशानी है, तो उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए। अगर उनके पास पैसे नहीं हैं, तो भारत सरकार उनके टिकट का इंतजाम कर देगी। लेकिन भारत केवल संविधान से ही चलेगा और हर नागरिक को इसका पालन करना होगा।”
- सैयद शाहनवाज हुसैन (भाजपा नेता):
शाहनवाज हुसैन ने इस बयान को ‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’ बताते हुए कहा, “ऐसे बयानों से मौलाना रशीदी पूरे समुदाय को बदनाम कर रहे हैं। उन्हें इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और अपने बयान के लिए तुरंत माफी मांगनी चाहिए।”
- बृजलाल (भाजपा सांसद):
सांसद बृजलाल ने मौलाना के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “रशीदी साहब को बता दीजिए कि यह देश संविधान से चलता है, शरीयत से नहीं और न ही कभी शरीयत से चलेगा। उनका यह सोचना बिल्कुल गलत है कि उम्र बढ़ने के कारण बलात्कार हो रहे हैं। पहले जब दस साल की उम्र में शादियां हो जाती थीं, तब भी शोषण होता था। मैं ऐसे बयानों की कड़ी निंदा करता हूं।”
मौलाना रशीदी की सफाई
बढ़ते विवाद के बीच मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि उनके बयान का राजनीतिकरण किया जा रहा है।
उन्होंने तर्क दिया, “झारखंड, असम, बिहार, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में आज भी कम उम्र में शादियां हो रही हैं। माता-पिता अपनी अनपढ़ बेटियों की शादी जल्दी कर देते हैं। मैंने जो कुछ भी कहा, वह समाज सुधार के हित में कहा था। मैंने कभी यह नहीं कहा कि 18 साल से कम उम्र की लड़कियों की शादी कर देनी चाहिए।”
इस पूरे मामले ने एक बार फिर देश में बाल विवाह विरोधी कानूनों और व्यक्तिगत धार्मिक कानूनों (पर्सनल लॉ) के बीच की बहस को गरमा दिया है।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)
