अमरावती। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने राज्य सरकार द्वारा कथित तौर पर मिड-डे मील योजना से जुड़े लगभग 85,000 कर्मचारियों को हटाने की तैयारी पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस कदम को हजारों गरीब परिवारों की आजीविका पर सीधा हमला बताते हुए सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।
जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि मिड-डे मील योजना केवल स्कूली बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हजारों महिलाओं और श्रमिक परिवारों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत भी है। उनका कहना है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों को हटाया जाता है तो इसका असर सीधे उन परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा, जो वर्षों से इस योजना के माध्यम से अपना जीवनयापन कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याण की भावना के विपरीत है। उनके अनुसार, जिन कर्मचारियों ने लंबे समय तक स्कूलों में बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, उन्हें इस तरह अचानक बेरोजगार करना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से अपील की कि किसी भी नीति परिवर्तन से पहले कर्मचारियों के हितों और उनके भविष्य को ध्यान में रखा जाए।
वाईएसआरसीपी प्रमुख ने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में गरीबों के कल्याण और रोजगार सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई थी। उन्होंने दावा किया कि मिड-डे मील योजना से जुड़े कर्मचारियों को सम्मानजनक अवसर और सुरक्षा देने का प्रयास किया गया था, जबकि वर्तमान सरकार के फैसलों से हजारों परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है।
जगन मोहन रेड्डी ने राज्य सरकार से मांग की कि प्रस्तावित कार्रवाई को तत्काल रोका जाए और कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर ऐसा समाधान निकाला जाए जिससे न तो बच्चों के लिए संचालित मिड-डे मील योजना प्रभावित हो और न ही कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ें। उन्होंने कहा कि सरकार को जनहित और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए निर्णय लेना चाहिए।
इस मुद्दे को लेकर आंध्र प्रदेश की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार के फैसले से बड़ी संख्या में निम्न आय वर्ग के परिवार प्रभावित होंगे, जबकि सरकार की ओर से इस संबंध में विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है। आने वाले दिनों में यह मामला राज्य की राजनीति और सामाजिक सरोकारों का महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है
