Saturday, July 11, 2026

भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: मानवाधिकार आयोग सक्रिय, जांच और कार्रवाई के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल

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पटना/भोजपुर। भोजपुर जिले में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों, परिजनों के गंभीर दावों और वायरल वीडियो के बाद अब मामला प्रशासनिक, कानूनी और राजनीतिक स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है। इसी बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज होने के बाद पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

  • मानवाधिकार आयोग पहुंचा मामला

मुजफ्फरपुर के मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा ने आयोग के समक्ष याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि 17 जून को हुई पुलिस कार्रवाई संदिग्ध परिस्थितियों में हुई और इसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है। शिकायत में पूरे मामले की जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

  • परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल

मृतक भरत तिवारी के परिजनों का दावा है कि उन्होंने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उन पर गोली चलाई गई। परिवार का कहना है कि घटना की निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक तथ्य सामने आ सकेंगे। वहीं पुलिस का पक्ष है कि कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई थी।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठित कर दिया है। आयोग पूरे घटनाक्रम, पुलिस कार्रवाई और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।

  • पांच पुलिसकर्मी निलंबित

प्रारंभिक प्रशासनिक कार्रवाई के तहत एक थानाध्यक्ष, दो सब-इंस्पेक्टर, एक एएसआई और एक कांस्टेबल सहित कुल पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने तक सभी पहलुओं की निष्पक्ष समीक्षा की जाएगी।

  • पुलिस मुख्यालय ने भी शुरू की जांच

बिहार पुलिस मुख्यालय ने मामले में अलग-अलग स्तरों पर जांच शुरू कर दी है। फोरेंसिक विशेषज्ञों और तकनीकी टीमों की मदद से साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

  • राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज

मामले को लेकर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कई नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि विभिन्न संगठनों ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की बात कही है। कुछ संगठनों ने राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी भी दी है यदि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं की गई।

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