Friday, June 19, 2026

सातवीं सीट पर फंसा चुनावी गणित, कांग्रेस-भाजपा दोनों ने ठोकी जीत की दावेदारी

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बेंगलुरु। कर्नाटक विधान परिषद की सात सीटों के लिए गुरुवार को मतदान के साथ राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई। चुनावी गणित और विधायकों की संख्या को देखते हुए अधिकांश सीटों पर तस्वीर लगभग स्पष्ट मानी जा रही है, लेकिन अंतिम सीट को लेकर राजनीतिक दलों के बीच जबरदस्त रणनीतिक मुकाबला देखने को मिल रहा है। इसी कारण मतदान प्रक्रिया पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई हैं।

सत्तारूढ़ कांग्रेस इस चुनाव में मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है और पार्टी नेतृत्व को भरोसा है कि उसके उम्मीदवार अपेक्षित समर्थन हासिल करने में सफल रहेंगे। पार्टी नेताओं का कहना है कि संगठन पूरी तरह एकजुट है और विधायकों के बीच किसी तरह की असहमति की स्थिति नहीं है। कांग्रेस का दावा है कि उसके पास पर्याप्त संख्या बल मौजूद है और परिणाम उसके पक्ष में रहने वाले हैं।

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के दावों पर सवाल उठाए हैं। भाजपा नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस नेतृत्व अपने विधायकों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है, जिसके चलते उन्हें एकजुट रखने के लिए विशेष राजनीतिक प्रबंधन करना पड़ा। भाजपा का कहना है कि चुनाव परिणाम आने के बाद वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी और विपक्षी गठबंधन को उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन मिलेगा।

इस चुनाव में कुल आठ उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि सीटें केवल सात हैं। यही कारण है कि एक सीट को लेकर मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्राथमिकता मतदान प्रणाली और वोटों के संभावित ट्रांसफर की भूमिका इस चुनाव में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। सहयोगी दलों के बीच वोटों के आदान-प्रदान की रणनीति भी परिणामों को प्रभावित कर सकती है।

चुनाव से पहले सभी दलों ने अपने-अपने विधायकों के साथ लगातार बैठकें कीं और मतदान की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। राजनीतिक गलियारों में क्रॉस-वोटिंग की संभावनाओं को लेकर भी चर्चाएं होती रहीं, हालांकि अधिकांश दलों ने अपने विधायकों की एकजुटता का दावा किया है। यही वजह है कि मतदान से पहले और मतदान के दौरान नेताओं के बयान लगातार सुर्खियों में बने रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव केवल विधान परिषद की सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की मौजूदा राजनीतिक ताकत और दलों के संगठनात्मक नियंत्रण की भी परीक्षा है। सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए यह अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत साबित करने का अवसर माना जा रहा है, जबकि भाजपा और जेडीएस इसे विपक्षी एकजुटता और भविष्य की रणनीति के नजरिए से महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना के साथ तस्वीर साफ हो जाएगी, लेकिन फिलहाल राजनीतिक दलों के दावे और आरोप-प्रत्यारोप चुनावी माहौल को पूरी तरह गर्माए हुए हैं। राज्य की राजनीति में इस चुनाव के नतीजों को आने वाले समय के बड़े राजनीतिक संकेतों के रूप में भी देखा जा रहा है।

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