Monday, July 13, 2026

कांग्रेस नेता प्रियंक खड़गे का RSS पर सीधा निशाना, बोले- संगठन सार्वजनिक करे आय-व्यय और कर अनुपालन का पूरा ब्योरा

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बेंगलुरु, 15 जून: कर्नाटक की राजनीति से उठी एक चिट्ठी ने राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। कर्नाटक सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियंक खड़गे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर संगठन की वित्तीय पारदर्शिता, कानूनी स्थिति और कर (टैक्स) अनुपालन से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। खड़गे का यह कदम ऐसे समय आया है, जब राजनीतिक दलों के बीच जवाबदेही और संस्थागत पारदर्शिता को लेकर बहस तेज होती जा रही है।

चिट्ठी में क्या उठाए गए सवाल?

प्रियंक खड़गे ने अपने पत्र में कहा कि देश में कार्यरत हर संस्था और संगठन को कानून के दायरे में रहकर पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि RSS अपनी संगठनात्मक संरचना, वित्तीय स्रोतों और कर संबंधी अनुपालन की स्थिति को सार्वजनिक करे।

खड़गे की प्रमुख मांगें

  • RSS की कानूनी और वैधानिक स्थिति स्पष्ट की जाए।
  • संगठन के वित्तीय स्रोतों की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
  • आय और व्यय से संबंधित विवरण उपलब्ध कराया जाए।
  • कर (Tax) नियमों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट की जाए।
  • संगठनात्मक ढांचे और जवाबदेही की प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए।

“जब सभी पर नियम लागू हैं, तो RSS पर क्यों नहीं?”

प्रियंक खड़गे ने सवाल उठाया कि देश में छोटे व्यापारियों, ट्रस्टों, गैर-सरकारी संगठनों और अन्य संस्थाओं को भी पंजीकरण तथा वित्तीय नियमों का पालन करना पड़ता है, तो फिर RSS की कार्यप्रणाली और वित्तीय व्यवस्था को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं होनी चाहिए।

पहले भी उठा चुके हैं यह मुद्दा

यह पहला अवसर नहीं है जब प्रियंक खड़गे ने RSS को लेकर सवाल खड़े किए हों। इससे पहले भी वे संघ के फंडिंग स्रोतों, कर स्थिति और सार्वजनिक जवाबदेही को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कर चुके हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खड़गे लगातार इस मुद्दे को उठाकर संस्थागत पारदर्शिता पर व्यापक बहस शुरू करना चाहते हैं।

RSS का क्या रहा है रुख?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से पूर्व में यह कहा जा चुका है कि संगठन की कार्यप्रणाली और कानूनी स्थिति स्पष्ट है तथा वह लागू नियमों के अनुरूप कार्य करता है। संघ से जुड़े पदाधिकारी पहले भी अपने वित्तीय और प्रशासनिक ढांचे को लेकर उठे सवालों पर सफाई दे चुके हैं।

सियासत गरमाने के आसार

खड़गे के इस कदम के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस इसे पारदर्शिता और जवाबदेही का मुद्दा बता सकती है, जबकि भाजपा और RSS समर्थक इसे राजनीतिक प्रेरित अभियान के तौर पर पेश कर सकते हैं।

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