Wednesday, September 23, 2026

छत्तीसगढ़ में BJP-Congress के मुकाबले ‘तीसरा विकल्प’ बनेगी AAP, संगठन मजबूत करने रायपुर पहुंचे संजय सिंह

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए खुद को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के विकल्प के रूप में स्थापित करने की रणनीति तेज कर दी है। इसी कड़ी में रविवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह रायपुर पहुंचे, जहां उन्होंने प्रदेश पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक कर आगामी राजनीतिक योजनाओं पर चर्चा की।

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में संजय सिंह ने संकेत दिए कि आम आदमी पार्टी अब छत्तीसगढ़ में अपनी राजनीतिक उपस्थिति को मजबूत करने के लिए आक्रामक रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता वर्षों से BJP और कांग्रेस के बीच सत्ता परिवर्तन देख रही है, लेकिन आम लोगों की बुनियादी समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं। ऐसे में जनता एक नए और विश्वसनीय राजनीतिक विकल्प की तलाश में है।

संजय सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी पूरे देश में संगठन विस्तार अभियान चला रही है और छत्तीसगढ़ इस अभियान का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी गांव-गांव और शहर-शहर तक अपने संगठन को मजबूत कर रही है तथा युवाओं, महिलाओं, किसानों और मजदूरों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।

इस दौरान उन्होंने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उनका कहना था कि आम जनता महंगी रसोई गैस, बढ़ती कीमतों और रोजगार की कमी से परेशान है, जबकि सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने में लगी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों के दौरान महंगाई पर नियंत्रण का दिखावा किया जाता है, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया जाता है।

पेपर लीक की घटनाओं का जिक्र करते हुए संजय सिंह ने कहा कि लाखों युवाओं का भविष्य अनिश्चितता में है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र लगातार परेशान हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान निकालने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी को प्राथमिकता दी जा रही है।

छत्तीसगढ़ के पर्यावरणीय मुद्दों पर बोलते हुए उन्होंने जंगलों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि विकास के नाम पर स्थानीय लोगों की भावनाओं और पर्यावरणीय संतुलन की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रायपुर में आयोजित यह बैठक केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं थी, बल्कि छत्तीसगढ़ में AAP की आगामी राजनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण संकेत भी है। पार्टी प्रदेश में अपनी जमीनी पकड़ मजबूत कर BJP और कांग्रेस के बीच तीसरे राजनीतिक विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रही है। आने वाले महीनों में AAP की सक्रियता और राजनीतिक अभियान इस दिशा में और तेज हो सकते हैं।

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